दीपका खदान विस्तार के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, जीएम कार्यालय पर जड़ा ताला

एसईसीएल दीपका खदान विस्तार की जद में आ रहे हरदीबाजार और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने शासकीय भवनों को तोड़े जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच लोकेश्वर कंवर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने दीपका जीएम कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर धरना दिया। ग्रामीणों ने मुआवजा, नौकरी, पुनर्वास और नई बसाहट की मांग उठाई।

Sep 20, 2026 - 11:47
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दीपका खदान विस्तार के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, जीएम कार्यालय पर जड़ा ताला

UNITED NEWS OF ASIA. एसईसीएल दीपका खदान के विस्तार की जद में आ रहे हरदीबाजार गांव में प्रबंधन की कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा सामने आया। शुक्रवार सुबह एसईसीएल प्रबंधन की ओर से एक्सीवेटर की मदद से स्वास्थ्य केंद्र, पटवारी कार्यालय और आंगनबाड़ी समेत आठ शासकीय भवनों को ढहाए जाने के बाद ग्रामीणों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त समय और सूचना नहीं दी गई, जबकि मुआवजा, नौकरी, पुनर्वास और नई बसाहट से जुड़ी उनकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं।

शनिवार सुबह करीब 9 बजे कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच लोकेश्वर कंवर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण दीपका महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के प्रदर्शन के चलते एरिया ऑफिस का कामकाज प्रभावित रहा और अधिकारी-कर्मचारियों को कार्यालय के बाहर रहना पड़ा। दीपका के सीजीएम अशोक कुमार ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

ग्रामीणों ने कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और नई बसाहट की व्यवस्था नहीं होती, तब तक शासकीय भवनों को तोड़ने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। अस्पताल के कर्मचारी संतोष के मुताबिक, भवन खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका दावा है कि जरूरी दस्तावेज, दवाइयां और अन्य सामग्री मलबे में दब गई। शनिवार को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे आसपास के गांवों के मरीजों को भी अस्पताल भवन टूटे मिलने के कारण वापस लौटना पड़ा।

प्रदर्शन में हरदीबाजार के अलावा सराईसिंगार, रैंकी, मलगांव, आमगांव, दर्शखांचा और सुआभोड़ी के ग्रामीण भी शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन खदान विस्तार की प्रक्रिया में प्रभावित हो चुकी है, लेकिन कई परिवारों को अब तक नौकरी, मकान और बसाहट से संबंधित मुआवजा नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिग्रहण में मुआवजा निर्धारण और पत्रक से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को दूर करने की मांग भी उठाई।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और मौके पर तैनात सीआईएसएफ जवानों तथा पुलिस बल के बीच हल्की नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसके बाद करीब 300 महिला-पुरुष ग्रामीण जीएम कार्यालय के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गए और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में उचित मुआवजा, प्रभावित परिवारों के लिए बेहतर पुनर्वास और नई बसाहट, भूमि अधिग्रहण के बदले नियमानुसार नौकरी तथा करीब 18 हेक्टेयर जमीन से प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा शामिल है। व्यापारियों ने भी ग्रामीणों के समर्थन में शनिवार के साप्ताहिक बाजार के दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध जताया।

कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने कहा कि प्रशासन को ग्राम पंचायत को पूर्व सूचना देकर कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए प्रबंधन से समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की। करीब आठ घंटे चले प्रदर्शन के बाद बिलासपुर मुख्यालय में मांगों पर चर्चा किए जाने के आश्वासन के बाद शाम करीब 5 बजे आंदोलन समाप्त हुआ। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आगे भी आंदोलन किया जा सकता है।