लेंसकार्ट ड्रेस कोड विवाद: बिलासपुर में हिंदू संगठनों का विरोध, कंपनी ने दी सफाई

बिलासपुर में Lenskart के ड्रेस कोड विवाद को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। कंपनी ने सभी धार्मिक प्रतीकों को स्वीकार करने की बात कहते हुए अपनी सफाई दी है।

Apr 20, 2026 - 17:28
 0  2
लेंसकार्ट ड्रेस कोड विवाद: बिलासपुर में हिंदू संगठनों का विरोध, कंपनी ने दी सफाई

UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर l छत्तीसगढ़ बिलासपुर में Lenskart के कथित ड्रेस कोड विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। सोमवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के स्टोर्स पर पहुंचकर जमकर विरोध जताया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को तिलक लगाकर और कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

जानकारी के अनुसार, विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि कंपनी द्वारा जारी ड्रेस कोड में हिंदू धार्मिक प्रतीकों जैसे तिलक, कलावा, बिंदी और मंगलसूत्र पहनने पर रोक लगाई जा रही है, जबकि अन्य समुदायों के धार्मिक परिधान जैसे हिजाब या बुर्का पर कोई रोक नहीं है। इसी बात को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई।

करीब 20 कार्यकर्ताओं का समूह शहर के सरकंडा, व्यापार विहार और मुंगेली नाका चौक स्थित लेंसकार्ट स्टोर्स पर पहुंचा। यहां उन्होंने कर्मचारियों के साथ बातचीत की और प्रतीकात्मक रूप से तिलक लगाकर एवं कलावा बांधकर विरोध जताया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कंपनी ने अपने निर्देशों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में दुकानों में तालाबंदी की जाएगी।


प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कंपनी के मालिक पर भी तीखे आरोप लगाए और कहा कि इस तरह के निर्देश धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में किसी प्रकार की हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली है और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

वहीं, इस विवाद के बीच कंपनी ने पहले ही अपनी ओर से सफाई जारी कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी बयान में कंपनी ने कहा कि उसने लोगों की भावनाओं को गंभीरता से सुना है और अपनी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि उसके दिशा-निर्देश सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान करते हैं। इसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों को स्वीकार किया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि इन प्रतीकों को अपवाद नहीं, बल्कि कर्मचारियों की पहचान का हिस्सा माना जाता है।

साथ ही, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति या कर्मचारी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे खेद है और भविष्य में नीतियां समानता और सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित रहेंगी।

यह मामला अब सामाजिक और सांस्कृतिक बहस का विषय बनता जा रहा है। एक ओर जहां संगठन इसे धार्मिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कंपनी इसे समावेशिता और समानता की नीति के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

फिलहाल, इस विवाद पर सभी की नजर बनी हुई है और यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस पर क्या नया मोड़ आता है।