कांकेर में नक्सली दासरू का आत्मसमर्पण, रूपी के मारे जाने के बाद बढ़ा दबाव

कांकेर में परतापुर एरिया कमेटी के सक्रिय नक्सली दासरू ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। तेलंगाना कैडर की नक्सली रूपी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद नक्सलियों में दहशत का माहौल है।

Apr 20, 2026 - 17:18
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कांकेर में नक्सली दासरू का आत्मसमर्पण, रूपी के मारे जाने के बाद बढ़ा दबाव

UNITED NEWS OF ASIA. कांकेर l छत्तीसगढ़ कांकेर जिले से नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता सामने आई है, जहां परतापुर एरिया कमेटी में सक्रिय नक्सली दासरू ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में तेलंगाना कैडर की नक्सली रूपी मुठभेड़ में मारी गई थी, जिसके बाद से नक्सली संगठन के भीतर भय का माहौल बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, दासरू लंबे समय से उत्तर बस्तर क्षेत्र में सक्रिय था और परतापुर एरिया कमेटी के सदस्य के रूप में काम कर रहा था। सोमवार को वह आमाबेड़ा थाना पहुंचा और पुलिस के सामने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो गया। इस आत्मसमर्पण की पुष्टि निखिल राखेछा ने की है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और मुठभेड़ों में मिल रही सफलता के कारण नक्सलियों में दबाव बढ़ा है। इसी दबाव और भय के चलते अब कई नक्सली आत्मसमर्पण का रास्ता अपना रहे हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई पुनर्वास नीति भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जिससे वे सामान्य जीवन जी सकें।

दासरू को आत्मसमर्पण के तुरंत बाद 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अलावा उसे अगले तीन वर्षों तक हर महीने 10,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। साथ ही, उसे निःशुल्क आवास, भोजन, कौशल विकास प्रशिक्षण और आजीविका के लिए आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

पुलिस का मानना है कि इस तरह की पुनर्वास योजनाएं नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे न केवल नक्सलवाद पर अंकुश लगेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

कांकेर और आसपास के बस्तर क्षेत्र में पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के कारण नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है और कई नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सल समस्या का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि विकास और पुनर्वास के माध्यम से भी संभव है। सरकार की यह नीति उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

फिलहाल, दासरू का आत्मसमर्पण नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे और भी आत्मसमर्पण होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।