मनेंद्रगढ़ में ‘विनाश’ की सुई: नशे की लत से खतरे में आती पीढ़ी और टूटता सामाजिक ताना-बाना
मनेंद्रगढ़ में इंजेक्शन वाले नशे का बढ़ता चलन युवाओं के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को गंभीर खतरे में डाल रहा है। यह समस्या अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक आपातकाल का रूप ले चुकी है।
UNITED NEWS OF ASIA.प्रदीप पाटकर, कोरिया | प्रमनेंद्रगढ़ शहर में नशे की समस्या अब केवल एक व्यक्तिगत कमजोरी नहीं रह गई है, बल्कि यह समाज के लिए एक खतरनाक “स्लो पॉइजन” बन चुकी है। विशेष रूप से इंजेक्शन के माध्यम से किया जाने वाला नशा (Injecting Drug Use – IDU) शहर की आने वाली पीढ़ी के अस्तित्व पर सीधा प्रहार कर रहा है। यह वही स्थिति है जिसे “हमारा नाश तो तुम्हारा सर्वनाश” कहा जा सकता है, जहाँ एक व्यक्ति की लत पूरे परिवार और समाज को तबाही की ओर धकेल देती है।
इंजेक्शन वाला नशा सबसे जानलेवा नशों में गिना जाता है। एक ही सुई का कई लोगों द्वारा उपयोग किए जाने से HIV/AIDS और हेपेटाइटिस-C जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारियाँ तेजी से फैल रही हैं। छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में IDU से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी एक गंभीर चेतावनी है। यह नशा न केवल शरीर की नसों को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को भी स्थायी रूप से प्रभावित करता है, जिससे युवा हिंसक, अस्थिर और अपराध की ओर प्रवृत्त हो जाते हैं।
इस संकट का सबसे भयावह पहलू इसका भविष्य की पीढ़ी पर पड़ने वाला प्रभाव है। चिकित्सकीय और वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नशे का असर केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह एपिजेनेटिक बदलावों के माध्यम से अगली पीढ़ी तक पहुँच सकता है। नशे के आदी माता-पिता की संतानें शारीरिक विकास में कमी, जन्मजात बीमारियों और मानसिक मंदता का शिकार हो सकती हैं। सीखने की क्षमता में कमी, चिड़चिड़ापन और व्यवहार संबंधी समस्याओं की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।
नशे के कारण परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। यह कुपोषण का एक दुष्चक्र बनाता है, जो बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना देता है। इस तरह नशा एक पूरी पीढ़ी को “बीमार और कमजोर” बनाने की ओर बढ़ रहा है।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में नशा मुक्ति केंद्रों की चर्चा तो होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव स्पष्ट दिखता है। नशीले इंजेक्शन और दवाओं की आसान उपलब्धता प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। केवल नशा मुक्ति केंद्र खोलना पर्याप्त नहीं है, जब तक सप्लाई चेन नहीं टूटती और युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार से नहीं जोड़ा जाता।
यदि आज मनेंद्रगढ़ का युवा “सुई की नोक” पर अपना भविष्य तलाश रहा है, तो वह अनजाने में आने वाली पीढ़ियों के पैरों में बेड़ियाँ डाल रहा है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे शहर और समाज के भविष्य का विनाश है।