नक्सलवाद पर अंतिम वार: शीर्ष माओवादी नेताओं पर सुरक्षा बलों की सटीक नजर, बदल गई है नक्सलियों की रणनीति

सरकार द्वारा माओवाद खत्म करने की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन नजदीक आने के साथ ही नक्सली संगठन अब रणनीति बदल रहे हैं। भूपति, रूपेश और चंद्रन्ना जैसे शीर्ष नेताओं के आत्मसमर्पण से संगठन कमजोर पड़ा है। वहीं सुरक्षा बल अब टॉप कैडर के माओवादियों को निशाने पर लेकर निर्णायक अभियान की तैयारी में हैं।

Nov 7, 2025 - 18:16
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नक्सलवाद पर अंतिम वार: शीर्ष माओवादी नेताओं पर सुरक्षा बलों की सटीक नजर, बदल गई है नक्सलियों की रणनीति

UNITED NEWS OF ASIA. जगदलपुर । देश से सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों और सरकार ने निर्णायक मोर्चा संभाल लिया है। केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने की तय की गई समयसीमा अब मात्र कुछ महीनों की दूरी पर है, और इसी बीच माओवादी संगठन अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहे हैं।

हाल में माओवादी संगठनों की ओर से जारी पत्रों और प्रेस नोट से संकेत मिले हैं कि संगठन अब संघर्ष की बजाय रणनीतिक बचाव और अस्तित्व बचाने की कोशिशों में जुटा है। उड़ीसा स्टेट कमेटी ने पोलित ब्यूरो महासचिव देवजी के पद ग्रहण के दावे को खारिज किया है, जबकि तेलंगाना स्टेट कमेटी ने अपनी शांति पहल (युद्धविराम) को छह महीने और बढ़ा दिया है।

दूसरी ओर दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के शीर्ष माओवादी नेताओं भूपति और रूपेश के आत्मसमर्पण से संगठन की रीढ़ कमजोर हो चुकी है। भूपति की पहचान संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में थी, वहीं रूपेश महाराष्ट्र राज्य समिति के वरिष्ठ नेता थे। इनके समर्पण के बाद बस्तर में माओवादियों की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने स्पष्ट कहा है कि अब शीर्ष माओवादी नेताओं के पास आत्मसमर्पण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई माओवादी हिंसा जारी रखता है, तो उसके खिलाफ संयुक्त अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जाएगी। आईजी के अनुसार, “सभी माओवादियों के पास अब आत्मसमर्पण ही एकमात्र रास्ता है, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”

गृह मंत्री विजय शर्मा ने हाल में बस्तर दौरे के दौरान संकेत दिया कि केंद्रीय समिति सदस्य हिड़मा से जुड़ी गतिविधियों पर भी जल्द राहतभरी खबरें मिल सकती हैं। सरकार सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष कैडरों को आत्मसमर्पण करने के लिए अंतिम अल्टीमेटम दे दिया गया है।

साल 2025 माओवादी संगठन के लिए बेहद झटके भरा साबित हुआ है। अब तक करीब 2000 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि नौ शीर्ष स्तर के सदस्य मारे गए हैं। नारायणपुर के माड़ क्षेत्र में महासचिव बसवराजू के मारे जाने के बाद संगठन नई नियुक्ति तक नहीं कर पाया है।

बस्तर में सुरक्षा बलों की घेराबंदी और निरंतर अभियानों ने माओवादियों की शक्ति को लगभग समाप्तप्राय बना दिया है। आने वाले महीनों में सुरक्षा बलों द्वारा टॉप कैडर पर अंतिम वार की संभावना जताई जा रही है, जिससे माओवादी आंदोलन का अंत तय माना जा रहा है।