भैंसबोड़ में जल संरक्षण और हरियाली की अनोखी पहल, 3 हजार ट्रेंच में सीड बॉल से बीजारोपण

बालोद जिले के डौंडी विकासखंड के ग्राम भैंसबोड़ में विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रामीणों ने 3 हजार ट्रेंच में सीड बॉल के माध्यम से बीजारोपण कर जल संरक्षण और हरियाली की अनोखी पहल की। यह अभियान मानसून में हरित आवरण बढ़ाने और भूजल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Jun 6, 2026 - 13:31
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भैंसबोड़ में जल संरक्षण और हरियाली की अनोखी पहल, 3 हजार ट्रेंच में सीड बॉल से बीजारोपण

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिले के डौंडी विकासखंड के ग्राम पंचायत भैंसबोड़ में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की है। सामूहिक सहभागिता के साथ ग्रामीणों ने न केवल जल संरक्षण पर काम किया, बल्कि क्षेत्र को हरियाली से समृद्ध बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाया है।

कलेक्टर के निर्देश और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष अभियान के तहत ग्राम भैंसबोड़ में पूर्व में निर्मित लगभग 3,000 ट्रेंच का उपयोग किया गया। इन ट्रेंचों के आसपास ग्रामीणों ने ‘सीड बॉल’ के माध्यम से बड़े पैमाने पर बीजारोपण किया, जिससे आने वाले समय में प्राकृतिक रूप से पौधों का विकास हो सके।

सीड बॉल तकनीक को पर्यावरण संरक्षण की एक प्रभावी और वैज्ञानिक विधि माना जाता है, जिसमें बीजों को मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री के साथ गोल आकार में तैयार कर भूमि में छोड़ा जाता है। बारिश के मौसम में ये बीज स्वतः अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। इसी तकनीक का उपयोग करते हुए भैंसबोड़ के ग्रामीणों ने आने वाले मानसून को ध्यान में रखते हुए यह अभिनव प्रयास किया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के साथ-साथ गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करना और क्षेत्र में हरित आवरण को बढ़ाना है। ग्रामीणों का मानना है कि ट्रेंच संरचना वर्षा जल को रोकने और भूमि में जल संचयन बढ़ाने में मदद करेगी, जबकि सीड बॉल से उगने वाले पौधे पर्यावरण संतुलन को मजबूत करेंगे।

इस अभियान में ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी उल्लेखनीय रही। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर इस कार्य को सफल बनाया। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि जनसहभागिता से इसे एक आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

अधिकारियों के अनुसार यह प्रयास न केवल भैंसबोड़ गांव के लिए, बल्कि पूरे जिले के लिए एक प्रेरणास्रोत है। यदि इसी तरह की तकनीकों को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाए, तो जल संकट और पर्यावरण असंतुलन जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आगामी बारिश के मौसम में जब ये सीड बॉल अंकुरित होकर पौधों में बदलेंगे, तब पूरा क्षेत्र हरियाली की नई तस्वीर पेश करेगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बनेगी, बल्कि ग्रामीण विकास और सतत पर्यावरण प्रबंधन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

भैंसबोड़ के ग्रामीणों की यह कोशिश इस बात का प्रमाण है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव रख सकते हैं।