पत्रकार सुरक्षा कानून के पालन की मांग को लेकर जगदलपुर में पत्रकारों का महाधरना प्रदर्शन

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बस्तर जिला पत्रकार संघ के बैनर तले पत्रकारों ने महाधरना-प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने बिना डीएसपी स्तर की जांच के सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने के मामलों पर आपत्ति जताते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की। आंदोलन को पत्रकार हितों की रक्षा के लिए सांकेतिक पहल बताया गया।

Jun 15, 2026 - 13:23
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पत्रकार सुरक्षा कानून के पालन की मांग को लेकर जगदलपुर में पत्रकारों का महाधरना प्रदर्शन

UNITED NEWS OF ASIA. बी महेश राव, बस्तर l बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर बस्तर जिला पत्रकार संघ के नेतृत्व में महाधरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए और पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई गई। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होने के बावजूद कई मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है।

धरना-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य उन घटनाओं के प्रति विरोध दर्ज कराना था, जिनमें पत्रकारों के खिलाफ बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधे एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। पत्रकार संघ का कहना है कि पत्रकार सुरक्षा कानून के तहत किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई से पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा जांच किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई मामलों में इस प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जो कानून की मूल भावना के विपरीत है।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और उनकी जिम्मेदारी समाज तथा शासन-प्रशासन के बीच सूचना का सेतु बनने की होती है। ऐसे में यदि पत्रकारों को उनके पेशेगत कार्यों के कारण बिना उचित जांच के कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून का उद्देश्य पत्रकारों को अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना से बचाना है, इसलिए इसका पालन पूरी गंभीरता से किया जाना चाहिए।

बस्तर जिला पत्रकार संघ ने मांग की कि पत्रकारों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले कानून में निर्धारित जांच प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। संघ का कहना है कि इससे पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा होगी और कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि किसी पत्रकार के विरुद्ध शिकायत होती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले सीधे एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं माना जा सकता।

आंदोलन के दौरान पत्रकारों ने प्रदेश के अन्य जिलों के पत्रकारों से भी एकजुट होने की अपील की। उनका मानना है कि यह केवल किसी एक जिले या संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि पत्रकारिता जगत से जुड़े सभी लोगों के अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित विषय है। इसलिए व्यापक स्तर पर जागरूकता और एकजुटता आवश्यक है।

प्रदर्शन में शामिल पत्रकारों ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें पत्रकारों पर सीधे एफआईआर दर्ज की गई। इन्हीं घटनाओं के मद्देनजर यह सांकेतिक आंदोलन आयोजित किया गया है, ताकि संबंधित अधिकारियों और शासन का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित किया जा सके।

पत्रकार संघ ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी जांच या कानूनी प्रक्रिया का विरोध करना नहीं है, बल्कि कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। प्रदर्शन के माध्यम से पत्रकारों ने पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और पत्रकारों को कानून के तहत मिलने वाले संरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग उठाई। आंदोलन को लेकर पत्रकारों में व्यापक समर्थन देखने को मिला और इसे पत्रकार हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।