पीडब्ल्यूडी से 97 लाख खर्च पर आप का हमला — उपमुख्यमंत्री अरुण साव से जवाब मांगा
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे जवाब मांगा है। पार्टी अध्यक्ष गोपाल साहू ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अरुण साव के भांजे की तेरहवीं के कार्यक्रम में पीडब्ल्यूडी विभाग से 97 लाख रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि अगर तीन दिन में उपमुख्यमंत्री स्पष्टीकरण नहीं देते, तो आम आदमी पार्टी आंदोलन शुरू करेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर पीडब्ल्यूडी विभाग के माध्यम से 97 लाख रुपये खर्च करने का आरोप लगाया। आप के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह रकम अरुण साव के भांजे की तेरहवीं के कार्यक्रम में खर्च की गई, जो पूरी तरह से सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है।
गोपाल साहू ने कहा कि अगर यह आरोप गलत है तो उपमुख्यमंत्री को तत्काल सामने आकर सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा — “मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह भुगतान लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से किया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि एक पारिवारिक कार्यक्रम में जनता का पैसा खर्च किया गया। यदि अरुण साव तीन दिनों के भीतर इसका खंडन नहीं करते हैं, तो छत्तीसगढ़ की जनता मान लेगी कि आरोप सही हैं।”
आप प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा निजी आयोजनों में खर्च किया जाना लोकतंत्र और जवाबदेही की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर उपमुख्यमंत्री ने इस मामले में स्पष्टता नहीं दी तो आम आदमी पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
गोपाल साहू ने कहा कि आम आदमी पार्टी पारदर्शिता, ईमानदारी और जनता के हितों की राजनीति करती है और इस तरह के कथित भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा शासन-प्रशासन के प्रभाव का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जाना, जनता के भरोसे का उल्लंघन है।
वहीं, इस पूरे मामले पर अभी तक उपमुख्यमंत्री अरुण साव या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और विपक्षी दलों ने इसे सत्ता के दुरुपयोग से जोड़ते हुए सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य में पहले चरण के विधानसभा चुनावों के बीच यह विवाद भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। जनता अब उपमुख्यमंत्री के जवाब का इंतजार कर रही है, जिससे यह तय होगा कि यह मामला सिर्फ एक राजनीतिक आरोप है या किसी बड़े घोटाले की शुरुआत।