दुर्ग में गौधाम योजना की समीक्षा बैठक, गौधामों के बेहतर संचालन और गोवंश संरक्षण पर जोर

दुर्ग जिला पंचायत में गौधाम योजना जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में गौधामों के संचालन, गोवंश संरक्षण, चारा, पेयजल, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और आत्मनिर्भर प्रबंधन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए।

Jul 9, 2026 - 12:30
 0  5
दुर्ग में गौधाम योजना की समीक्षा बैठक, गौधामों के बेहतर संचालन और गोवंश संरक्षण पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l जिला पंचायत के सभा कक्ष में गौधाम योजना जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने की। बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग की जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, पंचायत सदस्य श्रद्धा साहू, पशुधन विकास विभाग के अधिकारी, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे।

बैठक में गौधाम योजना के तहत संचालित गौधामों के प्रभावी संचालन, रखरखाव और प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। योजना के अंतर्गत पंजीकृत गौधामों के अध्यक्ष और सचिव भी बैठक में शामिल हुए। उमरपोटी, नारघा, चंदखुरी और बासीन सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों की गौधाम समितियों के पदाधिकारियों ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं और आवश्यकताओं से समिति को अवगत कराया।

समीक्षा बैठक में गोवंश संरक्षण, नस्ल संवर्धन, पशुओं के उचित रखरखाव, मवेशी शेड, चारे की उपलब्धता, स्वच्छ पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर विशेष चर्चा की गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने संबंधित अधिकारियों को सभी गौधामों का नियमित निरीक्षण कर समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौधामों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

बैठक के दौरान गौधाम योजना के दिशा-निर्देशों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी गौधामों में गोवंश के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, छायादार व्यवस्था और आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गौधाम परिसरों की साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्य समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।

बैठक में गौधाम समितियों को योजना के प्रावधानों के अनुरूप अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण तथा वित्तीय प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि नियमित मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय के माध्यम से गौधामों को अधिक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है, जिससे पशुपालकों और स्थानीय समुदाय को भी अधिक लाभ मिलेगा।

जिले में गौधाम योजना के अंतर्गत बेसहारा, घुमंतु और निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए चार गौधाम पंजीकृत किए गए हैं। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 गोवंश रखने की क्षमता विकसित की गई है। इन गौधामों में पशु शेड, सुरक्षित बाड़ा, स्वच्छ पेयजल, बिजली और चारागाह जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन गौधामों का संचालन पंजीकृत गौशाला समितियों, ट्रस्टों और गैर-सरकारी संस्थाओं को सौंपा गया है। योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देने तथा चरवाहों और गौसेवकों के लिए रोजगार और मानदेय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।