वेदांता पावर प्लांट हादसा नहीं हत्या: दीपक बैज, मृतकों के लिए 1-1 करोड़ मुआवजे की मांग

सक्ति जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे हत्या करार देते हुए मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ और घायलों को 50 लाख मुआवजा देने की मांग की है।

Apr 15, 2026 - 13:00
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वेदांता पावर प्लांट हादसा नहीं हत्या: दीपक बैज, मृतकों के लिए 1-1 करोड़ मुआवजे की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l  सक्ती जिले के डभरा थाना क्षेत्र स्थित सिंघीतराई में वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार और प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना को “हादसा नहीं, बल्कि हत्या” करार दिया है।

दीपक बैज ने कहा कि बॉयलर फटने से 9 मजदूरों की मौत और 50 से अधिक श्रमिकों के घायल होने की घटना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

उन्होंने इस घटना के लिए सीधे तौर पर प्लांट प्रबंधन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक सुरक्षा पूरी तरह से उपेक्षित हो गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि इस घटना की न्यायिक जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये तथा घायलों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके।

दीपक बैज ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने रायपुर के गोदावरी प्लांट और बलौदाबाजार के स्वदेश मेटालिक प्लांट में हुए हादसों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कई मामलों में बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जाता है और जोखिम भरे कार्यों के दौरान आवश्यक सावधानियां नहीं बरती जातीं।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कई बार भट्टी बंद किए बिना ही काम कराया जाता है और बिना अनुमति के कार्य किए जाते हैं, जो श्रमिकों की जान के साथ खिलवाड़ है। यह स्थिति औद्योगिक सुरक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाती है।

कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रदेश में संचालित सभी उद्योगों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और कारखाना अधिनियम, 1948 तथा छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन और श्रम विभाग अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के कारण उद्योगों में नियमों का उल्लंघन बढ़ा है और शिकायतों के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे हादसों का सिलसिला जारी है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठाती रहेगी और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।