फर्जी कंपनी डायरेक्टर बनकर 20 लाख की ठगी, अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह गिरफ्तार

दुर्ग पुलिस ने कंपनी डायरेक्टर की फर्जी व्हाट्सएप डीपी लगाकर 20 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। सुपेला पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में राजस्थान के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नकदी, मोबाइल, एटीएम कार्ड और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।

May 28, 2026 - 11:19
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फर्जी कंपनी डायरेक्टर बनकर 20 लाख की ठगी, अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. भिलाई में कंपनी डायरेक्टर की फर्जी पहचान बनाकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का दुर्ग पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सुपेला थाना पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में राजस्थान के रहने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों पर फर्जी व्हाट्सएप डीपी लगाकर कंपनी से जुड़े लोगों को झांसे में लेकर करीब 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, सुंदर नगर निवासी यश बत्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने कंपनी डायरेक्टर की फोटो और प्रोफाइल लगाकर व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया। आरोपी ने खुद को कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए तत्काल पैसों की जरूरत बताई और अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली। बाद में जांच करने पर पता चला कि यह पूरा मामला साइबर ठगी का था।

शिकायत मिलने के बाद दुर्ग पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी रायपुर के अलग-अलग होटलों में ठहरकर लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे ताकि पुलिस को उनकी गतिविधियों की भनक न लग सके।

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी कर राजस्थान के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी व्हाट्सएप और जंगी ऐप के माध्यम से संपर्क कर लोगों को झांसे में लेते थे। वे फर्जी बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाकर तुरंत नकद निकासी कर लेते थे, जिससे पुलिस के लिए ट्रांजेक्शन ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 20 हजार रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 10 एटीएम कार्ड और बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कई वारदातों को अंजाम दिया हो सकता है। आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

दुर्ग पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह सुनियोजित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम देता था। आरोपी पहले कंपनी और उसके अधिकारियों की जानकारी जुटाते थे, फिर फर्जी प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों या संबंधित लोगों से संपर्क करते थे। भरोसा जीतने के बाद तत्काल भुगतान या ट्रांसफर के नाम पर रकम ठग ली जाती थी।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाले मैसेज या कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। खासतौर पर यदि कोई व्यक्ति वरिष्ठ अधिकारी या कंपनी डायरेक्टर बनकर पैसों की मांग करता है, तो पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें। साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।

दुर्ग पुलिस की तत्परता से इस अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा हो सका। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी साइबर अपराधियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।