व्हीलचेयर से अपने पैरों पर खड़ी हुई प्रगति, प्रशासन और उपचार ने बदली जिंदगी

बेमेतरा की 13 वर्षीय बालिका प्रगति ने प्रशासन, चाइल्ड हेल्पलाइन और चिकित्सकों के संयुक्त प्रयासों से नई जिंदगी पाई। कभी व्हीलचेयर पर निर्भर रहने वाली बालिका आज अपने पैरों पर आत्मविश्वास के साथ चल रही है। यह कहानी संवेदनशील प्रशासन और समय पर उपचार की प्रेरणादायी मिसाल है।

Jul 22, 2026 - 18:13
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व्हीलचेयर से अपने पैरों पर खड़ी हुई प्रगति, प्रशासन और उपचार ने बदली जिंदगी

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l कठिन परिस्थितियों में समय पर मिला सहयोग, संवेदनशील प्रशासन और बेहतर उपचार किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है। बेमेतरा जिले की 13 वर्ष 10 माह की बालिका प्रगति (काल्पनिक नाम) की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। एक समय ऐसा था जब गंभीर शारीरिक समस्या के कारण वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थी और व्हीलचेयर ही उसका सहारा बन चुकी थी। आज वही बालिका अपने पैरों पर आत्मविश्वास के साथ चल रही है और नई उम्मीद के साथ जीवन की ओर बढ़ रही है।

प्रगति का बचपन कई कठिनाइयों से भरा रहा। कम उम्र में मां का निधन हो गया और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसे अपने मामा के घर रहना पड़ा। इसी दौरान उसे गंभीर पेल्विक समस्या हो गई, जिससे उसकी चलने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई। उसकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि दैनिक जीवन के सामान्य कार्य भी व्हीलचेयर के बिना संभव नहीं थे। शारीरिक पीड़ा और पारिवारिक परिस्थितियों ने उसके भविष्य को अनिश्चित बना दिया था।

बालिका की स्थिति की जानकारी मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने तत्काल हस्तक्षेप किया। 18 मई 2026 को परियोजना समन्वयक के निर्देश पर सुपरवाइजर इंद्राणी सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रगति को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति के निर्देशानुसार उसकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए उसे 15 दिनों के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर में आश्रय दिया गया।

इसी दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया ने बालिका की स्थिति का संज्ञान लेते हुए चिकित्सकों से समन्वय स्थापित किया और बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर करने की पहल की। रेफरल से पहले जिला अस्पताल बेमेतरा में आवश्यक चिकित्सकीय जांचें कराई गईं। इस पूरी प्रक्रिया में चाइल्ड हेल्पलाइन, केस वर्कर और सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने अभिभावक की तरह उसकी देखभाल की और हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई।

विशेष उपचार के लिए प्रगति को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर भेजा गया। वहां अस्थि रोग विशेषज्ञों की सलाह पर उसे डीकेएस अस्पताल में एमआरआई सहित अन्य जरूरी जांचों से गुजरना पड़ा। उपचार के बाद 3 जून 2026 को उसे बाल जीवन ज्योति संस्था, रायपुर में पुनर्वास के लिए भेजा गया।

बाल जीवन ज्योति संस्था में प्रगति को सुरक्षित वातावरण, नियमित दवाइयां, चिकित्सकीय निगरानी और विशेष देखभाल मिली। डॉक्टरों के उपचार, संस्था की समर्पित सेवा और स्वयं प्रगति की मजबूत इच्छाशक्ति ने धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम दिए। लगातार उपचार और पुनर्वास के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वह अपने पैरों पर खड़ी होकर चलने लगी।

यह सफलता महिला एवं बाल विकास विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, सखी वन स्टॉप सेंटर, मेकाहारा, डीकेएस अस्पताल तथा बाल जीवन ज्योति संस्था के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। सभी संस्थाओं ने समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह साबित किया कि समय पर उचित उपचार और संवेदनशील सहयोग किसी भी जीवन को नई दिशा दे सकता है।

प्रगति की कहानी केवल एक बालिका के स्वस्थ होने की कहानी नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन, चिकित्सा व्यवस्था और समाज मिलकर कार्य करें तो असंभव दिखने वाली परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। यह प्रेरणादायी उदाहरण बताता है कि सही समय पर मिला सहयोग, विश्वास और समर्पण किसी भी व्यक्ति के जीवन में नई उड़ान भर सकता है।