पाड़ापुर टेलिंग डैम में गंभीर अनियमितताओं के आरोप, खबर के बाद दरारें ढंकने की कोशिश से बढ़ी सुरक्षा चिंता

दंतेवाड़ा के पाड़ापुर क्षेत्र में निर्माणाधीन टेलिंग डैम में सामने आई दरारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद कंपनी द्वारा जल्दबाजी में मिट्टी डालकर दरारें छुपाने की कोशिश ने डैम की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर संदेह और गहरा कर दिया है।

Jan 19, 2026 - 12:55
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पाड़ापुर टेलिंग डैम में गंभीर अनियमितताओं के आरोप, खबर के बाद दरारें ढंकने की कोशिश से बढ़ी सुरक्षा चिंता

UNITED NEWS OF ASIA. नविन चौधरी, दंतेवाड़ा / बचेली। पाड़ापुर क्षेत्र में निर्माणाधीन टेलिंग डैम को लेकर प्रकाशित खबर के बाद अब मामला और गंभीर होता नजर आ रहा है। डैम निर्माण में लगी कंपनी कल्पतरु द्वारा सामने आई दरारों को छुपाने के लिए पोकलेन मशीन से जल्दबाजी में ऊपर से मिट्टी डालकर समतल कर दिया गया। करीब 50 से 60 मीटर चौड़ाई में मिट्टी फैलाए जाने से डैम की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दरारों को ढंकना समाधान नहीं, बल्कि खतरे को छुपाने की कोशिश है। चूंकि नया टेलिंग डैम पुराने डैम के ऊपर ही बनाया जा रहा है, इसलिए पूरे ढांचे का भार पुराने डैम पर पड़ेगा। इससे उसकी मजबूती पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और भविष्य में डैम टूटने का खतरा बढ़ गया है।

यह डैम बैलाडीला की पहाड़ियों के नीचे स्थित है, जहां का कैचमेंट एरिया अत्यंत विशाल है। बारिश के मौसम में यहां पानी का बहाव तेज और अचानक होता है। यदि डैम पूरी क्षमता से भरता है और संरचना कमजोर रही, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे आसपास के इलाकों में जान-माल के भारी नुकसान की आशंका है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पंप हाउस का निर्माण पुराने डैम की फाउंडेशन के बेहद करीब किया जा रहा है, जिसे तकनीकी दृष्टि से गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। वहीं, निर्माण स्थल पर गड्ढों के चारों ओर अस्थायी घेराबंदी तो की गई है, लेकिन मूल संरचनात्मक खामियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

निर्माण स्थल वन विभाग के क्षेत्र के पास स्थित है। डैम निर्माण के दौरान उड़ रही धूल और मिट्टी आसपास के पेड़-पौधों पर जम गई है, जिससे हरियाली लाल रंग में तब्दील होती जा रही है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है, जबकि यह पूरा निर्माण कार्य मुख्य सड़क से साफ दिखाई देता है।

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या वन विभाग की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित है या पर्यावरण की वास्तविक सुरक्षा भी उसका दायित्व है। जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले से ही तीन से चार टेलिंग डैम मौजूद हैं, जिनमें भारी मात्रा में सिल्ट जमा है। यदि किसी भी कारण से डैम टूटता है, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना समुचित सुरक्षा परीक्षण के यह निर्माण क्यों जारी है और किसी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा। प्रशासन, खनन विभाग और वन विभाग की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।