मनखे-मनखे एक समान के जयघोष के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा

रायपुर से गिरौदपुरी धाम तक 145 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक ‘सतनाम सद्भाव पदयात्रा’ कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में भव्य रूप से संपन्न हुई। पदयात्रा ने सामाजिक समरसता, समानता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए 50 से अधिक गांवों को जोड़कर जन-जागरण का नया उदाहरण प्रस्तुत किया।

Feb 25, 2026 - 17:50
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मनखे-मनखे एक समान के जयघोष के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | आरंग / रायपुर / बलौदाबाजार / गिरौदपुरी धाम। “बोल रहा अब हिंदुस्तान — मनखे-मनखे एक समान” के संकल्प के साथ रायपुर के मोवा स्थित सतनाम भवन से प्रारंभ हुई पांच दिवसीय ऐतिहासिक सतनाम सद्भाव पदयात्रा का पावन समापन गिरौदपुरी धाम में भव्य रूप से हुआ।

इस पदयात्रा का शुभारंभ विष्णु देव साय एवं राजगुरु-धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब की उपस्थिति में रायपुर से किया गया था। कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में निकली इस पदयात्रा ने सामाजिक समरसता, बराबरी और राष्ट्रीय एकता का मजबूत संदेश दिया।

145 किलोमीटर की पदयात्रा, 50 से अधिक गांवों में जन-जागरण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुई यह यात्रा आरंग और बलौदाबाजार सहित विभिन्न अंचलों से होते हुए 145 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर गिरौदपुरी पहुंची। इस दौरान 50 से अधिक गांवों में जन-संपर्क, सामाजिक संदेश और सद्भाव के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

गिरौदपुरी धाम पहुंचते ही हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु घासीदास बाबा की पावन गुरु गद्दी में मत्था टेका और विशाल जैतखाम की वंदना की। पूरे परिसर में ‘सतनाम’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। पंथी नृत्य, मांदर की थाप और पारंपरिक अखाड़ा दलों के प्रदर्शन ने आध्यात्मिक उल्लास को और जीवंत कर दिया।

समरसता भोज बना सामाजिक एकता का प्रतीक

पदयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता प्रतिदिन आयोजित होने वाला ‘समरसता भोज’ रहा, जिसमें विभिन्न समाज और धर्मों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते नजर आए। यह बाबा घासीदास के “बराबरी” के संदेश को व्यवहार में उतारने का सशक्त उदाहरण रहा।

मार्ग में पुष्पवर्षा, जनसैलाब और सांस्कृतिक आयोजन

पूरी पदयात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में भारी उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर जेसीबी मशीनों के माध्यम से पुष्पवर्षा की गई और गुरु खुशवंत साहेब का गजमालाओं से भव्य स्वागत हुआ। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने नई पीढ़ी को सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया।

“यह नारा नहीं, समाज पुनर्निर्माण का संकल्प है” — गुरु खुशवंत साहेब

समापन समारोह को संबोधित करते हुए गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के पुनर्निर्माण का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि “मनखे-मनखे एक समान का संदेश तब तक अधूरा है, जब तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर नहीं मिलते।”

अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम

पूरी यात्रा के दौरान श्वेत वस्त्रों में अनुशासित कतारों में चलते पदयात्रियों ने सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। प्रशासन, सेवा शिविरों और स्वयंसेवकों के सहयोग से यह विशाल आयोजन सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

समापन के बाद गिरौदपुरी की धरती पर देर तक एक ही नारा गूंजता रहा—
“बोल रहा है हिंदुस्तान, मनखे-मनखे एक समान।”