मनेंद्रगढ़ CSPDCL में ‘सेवा शुल्क’ का खेल? 22 साल से एक ही कुर्सी पर जमे लाइन इंस्पेक्टर पर सवाल
मनेंद्रगढ़ स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) जोन ऑफिस में नए कनेक्शन, एवरेज बिलिंग और कथित ‘सेवा शुल्क’ वसूली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। वर्ष 2002 से एक ही स्थान पर पदस्थ लाइन इंस्पेक्टर की तैनाती पर भी सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, MCB। मनेंद्रगढ़ में स्थित छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के जोन कार्यालय पर उपभोक्ताओं के शोषण और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतों और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नए कमर्शियल बिजली कनेक्शन के लिए निर्धारित सुरक्षा निधि (डिपॉजिट) के अलावा उपभोक्ताओं से इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है, जबकि नियमों के अनुसार खंभे, तार और ट्रांसफार्मर का खर्च विभाग द्वारा वहन किया जाना चाहिए।
एवरेज बिलिंग का आरोप
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में कई ऐसे मीटर हैं जो लंबे समय से बंद पड़े हैं, लेकिन संबंधित उपभोक्ताओं को ‘एवरेज बिल’ जारी किए जा रहे हैं। आरोप है कि जब उपभोक्ता सुधार के लिए कार्यालय पहुंचते हैं, तो कथित रूप से ‘सेवा शुल्क’ के नाम पर अवैध वसूली की जाती है।
22 साल से एक ही पदस्थापना पर सवाल
सबसे गंभीर सवाल लाइन इंस्पेक्टर बरले की पदस्थापना को लेकर उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वे वर्ष 2002 से इसी जोन कार्यालय में पदस्थ हैं। दो दशक से अधिक समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर विभागीय ट्रांसफर नीति और निगरानी तंत्र पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि लंबे समय से एक ही पद पर बने रहने के कारण विभाग में एक मजबूत ‘सिस्टम’ विकसित हो गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विभागीय चुप्पी
नियमों के अनुसार संवेदनशील पदों पर समय-समय पर स्थानांतरण आवश्यक होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि:
-
क्या उच्च अधिकारियों को इस लंबी पदस्थापना की जानकारी है?
-
बंद मीटरों पर एवरेज बिलिंग किसके निर्देश पर हो रही है?
-
नए कनेक्शन में अतिरिक्त वसूली की शिकायतों की जांच कब होगी?
यह खबर जन शिकायतों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आरोपों की सत्यता की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अपेक्षित है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो निष्पक्ष जांच और कार्रवाई से ही उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल हो सकेगा।