डायमंड सिंह ध्रुव ने बताया कि CGPSC परीक्षा में चयन के बाद उनके दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं हाल ही में पूरी हुई हैं और जल्द ही उनकी पोस्टिंग होने वाली है। इसी बीच UPSC परीक्षा में भी सफलता हासिल कर उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत का एक और नया अध्याय जोड़ दिया है।
डायमंड सिंह ध्रुव साधारण परिवार से आते हैं। वे मगरलोड क्षेत्र के ग्राम परसवानी के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय बलराम सिंह ध्रुव मगरलोड जनपद पंचायत में अधिकारी के पद पर कार्यरत थे, जिनका निधन हो चुका है। उनकी माता एक शासकीय विद्यालय में शिक्षिका हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी और यही संस्कार डायमंड के जीवन में सफलता की मजबूत नींव बने।
बचपन से ही डायमंड सिंह ध्रुव पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शिशु मंदिर मगरलोड से प्राप्त की और बाद में रेडियंट पब्लिक स्कूल माना से हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में लगातार मेहनत करते रहे।
महज 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने CGPSC परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 13वीं रैंक हासिल की और DSP कैटेगरी में तीसरा स्थान प्राप्त कर पुलिस सेवा के लिए चयनित हुए। इसके बाद उन्होंने अपने लक्ष्य को और ऊंचा रखते हुए UPSC की तैयारी जारी रखी और अब 623वीं रैंक प्राप्त कर एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
डायमंड सिंह ध्रुव की यह उपलब्धि जिले के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बन गई है। सीमित संसाधनों और छोटे गांव से आने के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
इस उपलब्धि पर धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने डायमंड सिंह ध्रुव को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। कलेक्टर ने कहा कि डायमंड की सफलता से जिले के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।
डायमंड सिंह ध्रुव की सफलता यह संदेश भी देती है कि छोटे गांवों से निकलकर भी युवा देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंच सकते हैं और अपने प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सकते हैं।