“दो जून की रोटी” पहल ने बढ़ाया सामाजिक संवाद, एक साथ भोजन कर समाजहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

रायपुर में सामाजिक संस्था नवसृजन मंच द्वारा आयोजित “दो जून की रोटी” पहल के तहत विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक एकत्र हुए। कार्यक्रम में सभी ने अपने-अपने घरों से लाए गए व्यंजन साझा करते हुए सामाजिक सरोकार, भाईचारा और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर सामाजिक समरसता, संवाद और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

Jun 3, 2026 - 11:30
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“दो जून की रोटी” पहल ने बढ़ाया सामाजिक संवाद, एक साथ भोजन कर समाजहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l  सामाजिक संस्था नवसृजन मंच द्वारा आयोजित “दो जून की रोटी” कार्यक्रम ने सामाजिक समरसता, आपसी संवाद और भाईचारे का एक प्रेरणादायक संदेश दिया। इस अभिनव पहल के तहत प्रदेश की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, जनसेवी संगठनों के सदस्य तथा अनेक गणमान्य नागरिक एक मंच पर एकत्रित हुए और सामूहिक रूप से भोजन साझा करते हुए समाजहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच आत्मीयता, सहयोग और संवाद को मजबूत करना था। बदलती जीवनशैली और बढ़ती व्यस्तताओं के कारण लोगों के बीच व्यक्तिगत संपर्क कम होता जा रहा है। ऐसे समय में “दो जून की रोटी” जैसी पहल लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बन रही है।

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सभी सहभागी अपने घरों से अलग-अलग प्रकार के व्यंजन बनाकर लेकर पहुंचे। किसी ने पुलाव तैयार किया, तो किसी ने मिस्सी रोटी, आम पना, रायता और अन्य पारंपरिक व्यंजन लेकर कार्यक्रम में भागीदारी की। सभी ने एक-दूसरे के साथ भोजन साझा किया, जिससे पूरे आयोजन में पारिवारिक अपनत्व और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई दी।

इस दौरान उपस्थित लोगों ने समाज और जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने, संबंधों को मजबूत करने और सामाजिक एकता को बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम भी है। सामूहिक भोजन की परंपरा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जो लोगों के बीच समानता और भाईचारे की भावना विकसित करती है।

कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हमें अपनी उन परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने भारतीय समाज को सदियों तक एकजुट बनाए रखा। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज के लोगों का एक साथ बैठकर भोजन करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने यह भी कहा कि “दो जून की रोटी” केवल भोजन साझा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह संवाद, सहयोग और सामाजिक चेतना को मजबूत करने की एक सार्थक पहल है। जब लोग एक साथ बैठते हैं और अपना भोजन साझा करते हैं, तब केवल व्यंजन ही नहीं, बल्कि अनुभव, विचार और भावनाएं भी साझा होती हैं। यही प्रक्रिया समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द को मजबूत करती है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने नवसृजन मंच की इस पहल की सराहना करते हुए इसे नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता बताई। उनका मानना था कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच, आपसी सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देते हैं।

इस अवसर पर अमरजीत सिंह छाबड़ा, जसप्रीत सिंह सलूजा, किशोर महानंद, कांतिलाल जैन, विनय शर्मा, मनीषा सिंह, डॉ. प्रीति सतपथी, प्रीति दास मिश्रा, सीमा कांटकर, सोनल शर्मा, अर्चना वोरा, रेखा शर्मा, नंदिनी ढाके, गौरव दुबे और सविता मौर्य सहित प्रदेश की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।