बंगाल चुनाव में ‘पहचान की राजनीति’ बनाम भ्रष्टाचार का मुद्दा, अमित शाह पेश करेंगे आरोपपत्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा तृणमूल सरकार के खिलाफ आरोपपत्र जारी करने की तैयारी में है। पार्टी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और घुसपैठ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस क्षेत्रीय अस्मिता और बंगाली पहचान के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है।

Mar 26, 2026 - 13:19
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बंगाल चुनाव में ‘पहचान की राजनीति’ बनाम भ्रष्टाचार का मुद्दा, अमित शाह पेश करेंगे आरोपपत्र

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जहां आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। इस चुनाव में जहां एक ओर भाजपा भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और घुसपैठ जैसे मुद्दों को लेकर मैदान में उतरी है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी क्षेत्रीय अस्मिता और बंगाली पहचान को प्रमुख मुद्दा बना रही है।

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी 28 मार्च को राज्य की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ एक विस्तृत आरोपपत्र (चार्जशीट) जारी करने जा रही है। इस आरोपपत्र में पिछले कई वर्षों के दौरान राज्य में हुए कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताओं और आर्थिक गिरावट जैसे मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही भाजपा अपने चुनावी अभियान को और धार देने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में इस आरोपपत्र को जनता तक पहुंचाने की योजना बना रही है।

भाजपा का आरोप है कि पिछले 14 वर्षों में पश्चिम बंगाल से हजारों कंपनियां पलायन कर चुकी हैं, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। पार्टी नेताओं का दावा है कि उद्योगों के बाहर जाने के कारण राज्य “मजदूर निर्यात अर्थव्यवस्था” में बदलता जा रहा है। इसके अलावा बेरोजगारी का मुद्दा भी भाजपा के चुनावी एजेंडे में प्रमुख स्थान रखता है।

प्रधानमंत्री और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी साफ संकेत दिए हैं कि इस बार चुनाव में ‘घुसपैठ’ का मुद्दा प्रमुख रहेगा। पार्टी का मानना है कि अवैध घुसपैठ राज्य की सुरक्षा और संसाधनों पर दबाव डाल रही है, जिसे रोकना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा अपने समर्थकों के बीच मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रही है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस भाजपा के इन आरोपों का जवाब क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे से दे रही है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा बाहरी लोगों को बढ़ावा देकर बंगाल की संस्कृति और पहचान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ‘बंगाल का वंचन’ और ‘बंगाली का वंचन’ जैसे नारों के साथ चुनावी मैदान में उतरी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल विकास बनाम भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहचान की राजनीति बनाम प्रशासनिक मुद्दों की लड़ाई बन चुका है। भाजपा द्वारा उम्मीदवारों की सूची हिंदी में जारी करना भी इसी बहस को और हवा दे रहा है, जिसे टीएमसी अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है।

इसके अलावा, बंगाल में मतदाता सूची के सत्यापन (SIR) और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी विवाद बना हुआ है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जिसे वह चुनावी मुद्दा बना रही है।

चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी।

इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है, हालांकि कांग्रेस और वामपंथी दल भी अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किस मुद्दे को प्राथमिकता देते हैं—भ्रष्टाचार और विकास या फिर क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता।