50 लाख की लागत से बने तालाब को पाटने पर विवाद, NMDC पर उठे सवाल

दंतेवाड़ा के बचेली पुराना मार्केट क्षेत्र में DMF मद से लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बने तालाब को NMDC प्रबंधन द्वारा पाटे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रबंधन का कहना है कि तालाब टेलिंग डैम की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, जबकि स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए विरोध जताया है।

May 13, 2026 - 11:46
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50 लाख की लागत से बने तालाब को पाटने पर विवाद, NMDC पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l दंतेवाड़ा जिले के बचेली क्षेत्र में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां पुराना मार्केट इलाके में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बने तालाब को NMDC प्रबंधन द्वारा पाटे जाने की कार्रवाई की जा रही है। यह तालाब वर्ष 1975 के आसपास बने टेलिंग डैम के नीचे लगभग पांच वर्ष पूर्व वन विभाग द्वारा जिला खनिज न्यास (DMF) मद से बनाया गया था। अब इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

NMDC प्रबंधन का कहना है कि यह तालाब टेलिंग डैम की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, इसलिए इसे हटाया जा रहा है। लेकिन इस कदम को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब तालाब का निर्माण किया गया था, तब NMDC प्रबंधन ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन अब अचानक इसे सुरक्षा के नाम पर पाटना कई सवाल खड़े करता है।

इस पूरे मामले में नगरपालिका प्रशासन ने NMDC के महाप्रबंधक को नोटिस जारी किया है। वहीं वन विभाग की टीम ने भी स्थल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया है। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह तालाब केवल जल संरक्षण के लिए ही नहीं बल्कि पुराना मार्केट क्षेत्र के निवासियों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भी महत्वपूर्ण था। यहां धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान पानी की आवश्यकता अधिक रहती थी। पहले इस क्षेत्र में एकमात्र नाला ही पानी का स्रोत था, लेकिन NMDC द्वारा छोड़े गए लाल अपशिष्ट (टेलिंग) के कारण उसका पानी प्रदूषित हो गया और उपयोग योग्य नहीं रहा। साथ ही NMDC टाउनशिप से निकलने वाला गंदा पानी भी उसी में मिलने की बात सामने आई है, जिससे जल स्रोत पूरी तरह प्रभावित हुआ।

ऐसे में यह तालाब स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन गया था। अब इसके पाटे जाने से क्षेत्र में फिर से जल संकट की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि इससे धार्मिक आयोजनों और दैनिक जरूरतों पर भी असर पड़ेगा।

वहीं ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने 2025 में हुई भारी बारिश का भी जिक्र किया है, जब टेलिंग डैम में दरारें आ गई थीं और पूरे दंतेवाड़ा जिले में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। लोगों का सवाल है कि उस समय की वास्तविक समस्या और डैम प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने के बजाय हाल ही में बने तालाब को हटाना कितना उचित है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वास्तविक कारणों की जांच करने के बजाय तालाब को दोषी ठहराकर समस्या से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह केवल जल संरचना को नष्ट करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों को प्रभावित करने जैसा कदम है।

फिलहाल नगरपालिका और वन विभाग की संयुक्त जांच जारी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस महत्वपूर्ण जल स्रोत को बचाया जाएगा या फिर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।