पेलमा जनसुनवाई को लेकर विवाद तेज, ग्रामीणों का विरोध जायज: शाखा यादव

रायगढ़ जिले में 19 मई को प्रस्तावित पेलमा कोल खदान की जनसुनवाई को लेकर विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस शहर जिला अध्यक्ष शाखा यादव ने ग्रामीणों के विरोध को जायज बताते हुए कहा कि प्रशासन को उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए या जनसुनवाई निरस्त करनी चाहिए। ग्रामीण लंबे समय से परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

May 13, 2026 - 12:10
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पेलमा जनसुनवाई को लेकर विवाद तेज, ग्रामीणों का विरोध जायज: शाखा यादव

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले में प्रस्तावित पेलमा कोल खदान को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। जिला प्रशासन द्वारा 19 मई को जनसुनवाई निर्धारित किए जाने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में विरोध तेज हो गया है। लंबे समय से इस परियोजना को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जिसमें कई बार स्थिति तनावपूर्ण भी रही है। अब एक बार फिर जनसुनवाई की तारीख तय होने के बाद मामला गरमा गया है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पेलमा कोल परियोजना से उनकी जमीन, पर्यावरण और आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। पहले भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए परियोजना प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों और समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

इस बीच कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष शाखा यादव ने ग्रामीणों के विरोध को पूरी तरह जायज बताया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की मांगें वास्तविक हैं और प्रशासन को या तो उन्हें पूरा करना चाहिए या फिर जनसुनवाई को निरस्त करना चाहिए। उनके अनुसार, बिना स्थानीय लोगों की सहमति के किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

शाखा यादव ने यह भी कहा कि जिले में लगभग 20 से 25 औद्योगिक इकाइयां पहले से स्थापित हैं, इसके बावजूद क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर केवल वादे किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खदान परियोजना से उनके गांवों का पर्यावरण प्रभावित होगा, खेती की जमीन कम होगी और जल स्रोतों पर भी असर पड़ेगा। इसी कारण वे लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। कई बार विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति भी बन चुकी है।

प्रशासन द्वारा 19 मई को पुनः जनसुनवाई आयोजित करने के निर्णय के बाद अब एक बार फिर क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनती दिख रही है। ग्रामीण संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी औद्योगिक परियोजना से पहले स्थानीय लोगों की सहमति और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन बेहद जरूरी होता है। यदि संवाद और समाधान की प्रक्रिया सही ढंग से नहीं अपनाई जाती, तो ऐसे विवाद लंबे समय तक चलते रहते हैं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के विरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गर्मा सकता है।