पीएम मोदी की अपील पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी का बड़ा फैसला, छोड़ा प्रोटोकॉल और सरकारी गाड़ी का उपयोग
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद बड़ा निर्णय लेते हुए सरकारी गाड़ी और प्रोटोकॉल का सीमित उपयोग करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में वे पायलट और फॉलो गाड़ियों का उपयोग नहीं करेंगे तथा केवल आपातकालीन स्थिति में ही इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इस पहल को ईंधन बचत और सादगी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद एक बड़ा और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि सामान्य परिस्थितियों में वे मंत्री पद के तहत मिलने वाले पायलट वाहन, फॉलो गाड़ी और प्रोटोकॉल का उपयोग नहीं करेंगे। केवल अत्यंत आवश्यक और आपातकालीन परिस्थितियों में ही वे सरकारी प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करेंगे। उनके इस फैसले को सादगी, ईंधन बचत और जनजागरूकता की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने निर्णय की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर उन्होंने स्थिति सामान्य होने तक कुछ अति आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी प्रकार की पायलट या फॉलो गाड़ी का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया है। उनके इस ऐलान के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
माना जा रहा है कि वित्त मंत्री की इस पहल का प्रभाव अन्य मंत्रियों, निगम-मंडल के पदाधिकारियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार के अन्य प्रतिनिधि भी ईंधन बचत और सादगी को बढ़ावा देने के लिए इसी तरह के कदम उठा सकते हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से संसाधनों की बचत और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील की थी। उन्होंने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, जहां संभव हो वहां घर से काम करने और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही विदेशी उत्पादों के बजाय स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और एक वर्ष तक अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने जैसी अपीलें भी की थीं।
प्रधानमंत्री की सात प्रमुख अपीलों में पेट्रोल बचत, खाने के तेल के उपयोग में कटौती, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी अपनाने जैसे विषय शामिल थे। इन अपीलों का उद्देश्य देश में संसाधनों के संतुलित उपयोग और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में जनभागीदारी को मजबूत करना बताया जा रहा है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी के इस फैसले को आम जनता के बीच सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं सादगी और बचत का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो समाज में भी इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने उनके निर्णय की सराहना की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी प्रोटोकॉल और अतिरिक्त वाहनों के सीमित उपयोग से ईंधन की बचत के साथ-साथ सरकारी खर्चों में भी कमी लाई जा सकती है। साथ ही इससे पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
फिलहाल ओपी चौधरी का यह कदम प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या अन्य मंत्री और अधिकारी भी इसी तरह की पहल करते हैं या नहीं।