सिम्स में 6 वर्षीय बालक की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, विशेषज्ञों ने बचाई जान

बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल में ईएनटी, रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने 6 वर्षीय बालक की आहार नली में फंसे सिक्के को सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचाई। समय पर किए गए उपचार से बालक की हालत सामान्य है। चिकित्सकों ने अभिभावकों से बच्चों को छोटी वस्तुओं से दूर रखने की अपील की है।

Jul 17, 2026 - 10:39
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सिम्स में 6 वर्षीय बालक की आहार नली से सफलतापूर्वक निकाला गया सिक्का, विशेषज्ञों ने बचाई जान

UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी, बिलासपुर l बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के चिकित्सकों ने एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 6 वर्षीय बालक की आहार नली में फंसे सिक्के को निकालकर उसकी जान बचाई। ईएनटी, रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम के समन्वित प्रयास से यह सफल उपचार संभव हो सका।

जानकारी के अनुसार, बैगा जनजाति से संबंध रखने वाला 6 वर्षीय नरेंद्र, निवासी सरगोंड, तहसील कोटा, खेलते समय सुबह करीब 7 बजे गलती से एक सिक्का निगल बैठा। इसके बाद उसे निगलने में गंभीर परेशानी होने लगी। परिजन पहले उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।

शाम करीब 6:30 बजे बालक के सिम्स पहुंचने पर ईएनटी विभाग ने तत्काल जांच शुरू की और एक्स-रे कराने के लिए भेजा। रेडियोलॉजी विभाग द्वारा किए गए परीक्षण में स्पष्ट हुआ कि सिक्का श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे अन्ननली के ऊपरी हिस्से में फंसा हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने सामान्य एनेस्थीसिया देकर प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया। इसके बाद ईएनटी विभाग की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के माध्यम से अत्यंत सावधानीपूर्वक सिक्के को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति सामान्य एवं संतोषजनक बताई गई।

सिम्स प्रशासन का कहना है कि संस्थान में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के बेहतर समन्वय के कारण जटिल एवं आपातकालीन मामलों का भी समयबद्ध और सफल उपचार किया जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा इसके लिए चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

चिकित्सकों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि छोटे बच्चों की पहुंच से सिक्के, बटन बैटरी, चुंबक, छोटे खिलौनों के हिस्से और अन्य सूक्ष्म वस्तुओं को हमेशा दूर रखें। यदि किसी बच्चे द्वारा ऐसी कोई वस्तु निगल ली जाए और उसे निगलने में कठिनाई, लगातार लार टपकना, गले में दर्द या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपाय करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित चिकित्सा हस्तक्षेप से ऐसे मामलों में गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। सिम्स की इस सफल चिकित्सा ने एक बार फिर यह साबित किया है कि समय पर उपचार और विशेषज्ञों की संयुक्त कार्यशैली से गंभीर परिस्थितियों में भी मरीजों की जान बचाई जा सकती है।