RTE शुल्क प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग खारिज, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पर विकास तिवारी का निशाना

छत्तीसगढ़ शासन ने RTE के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि ₹15,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष करने की प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की मांग को अस्वीकार कर दिया है। इस फैसले के बाद सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने एसोसिएशन पर सवाल उठाते हुए उसके आंदोलन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार के निर्णय के बाद आगे की रणनीति स्पष्ट करने की मांग की।

Jul 17, 2026 - 10:34
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RTE शुल्क प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग खारिज, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पर विकास तिवारी का निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को राज्य सरकार ने अस्वीकार कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 जून 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान बजट और लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए मौजूदा प्रतिपूर्ति राशि पर्याप्त है तथा इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष किए जाने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार के इस निर्णय के बाद सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने इसे छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के लिए बड़ा झटका बताया है। उनका कहना है कि एसोसिएशन लंबे समय से शुल्क प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग कर रहा था, लेकिन शासन ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब संगठन को अपने अगले कदम के बारे में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।

विकास तिवारी ने प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता और सचिव मोतीलाल जैन से सवाल करते हुए पूछा कि सरकार द्वारा मांग खारिज किए जाने के बाद संगठन की रणनीति क्या होगी। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि एसोसिएशन का आंदोलन अब "मिस्टर इंडिया" की तरह गायब होता दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि जब मांगों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, तब संगठन काफी सक्रिय था, लेकिन सरकार के फैसले के बाद उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

उन्होंने संगठन से यह भी पूछा कि क्या वह सरकार के इस निर्णय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा, न्यायालय का रुख करेगा या फिर शासन के आदेश को स्वीकार कर आगे कोई कदम नहीं उठाएगा। उनके अनुसार यदि संगठन कोई विरोध या वैधानिक कार्रवाई नहीं करता है, तो यह माना जाएगा कि उसके पहले के दावे केवल प्रतीकात्मक थे।

विकास तिवारी ने एक अन्य मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी वित्तीय स्वीकृति आदेशों में मुख्य रूप से कक्षा 1 से 8 तक के RTE विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति का उल्लेख दिखाई देता है, जबकि नर्सरी, केजी-1, केजी-2 और कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति को लेकर सार्वजनिक दस्तावेजों में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस विषय में स्कूल शिक्षा विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी, ताकि RTE शुल्क प्रतिपूर्ति व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और सभी पात्र विद्यार्थियों को मिलने वाली सहायता की स्थिति स्पष्ट हो।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला शासन के आदेश और उस पर सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी की प्रतिक्रिया से जुड़ा है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में RTE शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर आगे की स्थिति और संगठन की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।