संबलपुर पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव पर रोक: सचिव पर लगे गंभीर आरोप

बालोद जिले के संबलपुर ग्राम पंचायत में सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपर कलेक्टर ने रोक लगा दी है। मामले में सचिव पर न्यायालय आदेश की अवहेलना और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

Apr 24, 2026 - 15:26
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संबलपुर पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव पर रोक: सचिव पर लगे गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम पंचायत संबलपुर (लो.) में सरपंच के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद नया मोड़ आया है, जहां अपर कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत संबलपुर की सरपंच रेणु गायकवाड़ के खिलाफ 15 अप्रैल 2026 को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि सरपंच का आरोप है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह अवैधानिक और नियमों के विरुद्ध था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर, बालोद ने 20 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर इस प्रस्ताव के अमल पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी।

अपर कलेक्टर के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ पंचों के हस्ताक्षर उनकी जानकारी के बिना कराए गए, जबकि कुछ को कथित रूप से लालच देकर समर्थन लिया गया। इसके अलावा, पीठासीन अधिकारी की कार्यवाही भी निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई, जिससे पूरे प्रस्ताव की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब 23 अप्रैल 2026 को सरपंच द्वारा न्यायालय के आदेश के पालन हेतु पंचायत कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। आरोप है कि पंचायत सचिव ने आवेदन लेने से ही इनकार कर दिया। इस घटना के दौरान पंचायत के कई पंच, कर्मचारी और अन्य गवाह मौजूद थे, जिससे विवाद और गहरा गया है।

सरपंच रेणु गायकवाड़ ने इस पूरे मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सत्य की जीत हुई है। उन्होंने सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अपर कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद आवेदन न लेना न्यायालय की अवमानना के समान है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित सचिव के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

इस विवाद का असर पंचायत के कामकाज पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि सरपंच ने ग्रामवासियों को भरोसा दिलाया है कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पंचायत की योजनाएं और जनहित के कार्य पूर्व की तरह जारी रहेंगे।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे पंचायत के अंदरूनी विवाद का परिणाम मान रहे हैं।

कुल मिलाकर, संबलपुर पंचायत का यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, नियमों के पालन और स्थानीय शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालय के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।