आयकर विभाग और व्यापारियों के बीच विश्वास बढ़ाने की पहल, चेम्बर ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने आयकर प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्य आयकर आयुक्त को महत्वपूर्ण सुझाव सौंपे। RDTAC बैठक में व्यापारियों और विभाग के बीच विश्वास बढ़ाने पर जोर दिया गया।

Apr 24, 2026 - 15:32
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आयकर विभाग और व्यापारियों के बीच विश्वास बढ़ाने की पहल, चेम्बर ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में व्यापारिक माहौल को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधिमंडल ने 23 अप्रैल 2026 को रायपुर स्थित केंद्रीय राजस्व भवन, सिविल लाइंस में आयोजित RDTAC (Regional Direct Taxes Advisory Committee) की बैठक में भाग लेकर आयकर प्रक्रियाओं में सुधार के लिए कई अहम सुझाव प्रस्तुत किए।

चेम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष राधा किशन सुन्दरानी ने मुख्य आयकर आयुक्त के. देवरत्न कुमार और अतिरिक्त आयुक्त ऋतुपर्ण नामदेव को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर लोकसभा सांसद रूप कुमारी चौधरी की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

बैठक में चेम्बर ने “Facilitation over Enforcement” यानी प्रवर्तन से अधिक सुविधा आधारित नीति अपनाने पर जोर दिया। प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि आयकर विभाग और करदाताओं के बीच नियमित संवाद स्थापित करने के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित किया जाए और RDTAC की बैठकों को त्रैमासिक आधार पर आयोजित किया जाए।

इसके अलावा, नोटिस की जटिलता को कम करने और छोटे एवं मध्यम करदाताओं के लिए “सिम्प्लीफाइड कम्प्लायंस फ्रेमवर्क” लागू करने की मांग की गई। चेम्बर ने यह भी सुझाव दिया कि केवल रिस्क-आधारित स्क्रूटनी को प्राथमिकता दी जाए, जिससे अनावश्यक जांच से व्यापारियों को राहत मिल सके।

फेसलेस स्कीम के अंतर्गत व्यापारियों को वर्चुअल हीयरिंग (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) का प्रभावी अधिकार देने और सरल भाषा में क्वेरी जारी करने पर भी बल दिया गया। MSME सेक्टर को ध्यान में रखते हुए टियर-2 और टियर-3 शहरों में टैक्स जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा छोटे व्यापारियों के लिए “कम्प्लायंस सपोर्ट सेंटर” स्थापित करने की मांग भी रखी गई।

चेम्बर ने छोटे मामलों में मुकदमेबाजी को कम करने के लिए थ्रेशोल्ड लिमिट बढ़ाने और मानवीय त्रुटियों को सुधारने हेतु “पेनल्टी-फ्री करेक्शन विंडो” की व्यवस्था करने का सुझाव दिया। साथ ही, आयकर पोर्टल में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) विकसित करने और फाइलिंग की अंतिम तिथि के दौरान सिस्टम की स्थिरता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

कार्यकारी अध्यक्ष राधा किशन सुन्दरानी ने कहा कि चेम्बर का मुख्य उद्देश्य कर प्रशासन को सरल, पारदर्शी और विश्वास-आधारित बनाना है। उन्होंने बताया कि यदि व्यापारियों को अनावश्यक जटिलताओं और बार-बार आने वाली क्वेरीज से राहत मिलती है, तो इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और टैक्स कम्प्लायंस स्वतः बेहतर होगा।

मुख्य आयकर आयुक्त के. देवरत्न कुमार ने चेम्बर द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए उन्हें गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। इस बैठक में चेम्बर के अन्य पदाधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

यह पहल निश्चित रूप से आयकर विभाग और व्यापारिक समुदाय के बीच विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।