मोर मयारू गांव दुगाटोला,तोर कइसे करों बखान- जयंत यादव

मोहला-मानपुर जिले का दुगाटोला गांव अपनी समृद्ध संस्कृति, धार्मिक आस्था, शिक्षा के प्रति समर्पण और सामाजिक एकता के लिए विशेष पहचान रखता है। जयंत यादव ने अपने गांव की विरासत, परंपराओं और विकास यात्रा को भावनात्मक शब्दों में प्रस्तुत किया है।

May 31, 2026 - 16:26
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मोर मयारू गांव दुगाटोला,तोर कइसे करों बखान- जयंत यादव

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद खान, मोहला | मानपुर_वनांचल जिला मोहला-मानपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर, गोटाटोला मुख्य मार्ग से जुड़ा मेरा गांव  "दुगाटोला" ।प्रकृति की गोद में बसा एक सुंदर और शांत ग्राम है। यहां की मिट्टी की सौंधी महक, संस्कृति और सभ्यता की खुशबू बिखेरती है। यह केवल एक गांव नहीं, बल्कि हमारे पुरखों की कर्मभूमि है, जिसने पीढ़ियों को संस्कार, संघर्ष और सफलता का मार्ग दिखाया है_।

गांव की पहचान और विरासत
"दुगाटोला" का नाम लेते ही आंखों के सामने गांव का विशाल "भांठा मैदान" और वर्षों पुराना "बरगद" का वृक्ष जीवंत हो उठता है। यही वह स्थान है जहां गांव के बच्चों के सपने आकार लेते हैं और बचपन की अनगिनत यादें आज भी सुरक्षित हैं। यह बूढ़ा बरगद हमें अपनत्व, ममत्व और एकता का संदेश देता है। "भाठा मैदान "  पूर्वजों की वह सोच का प्रतिक जिसमे हमारे बच्चे हमारे सामने नई पीढ़ी की प्रेरणा बने इस सोच से दान की भूमि है जहाँ विशाल बरगद वृक्ष  बिना किसी भेदभाव के सभी को छाया प्रदान करता है, उसी प्रकार गांव के वरिष्ठजन अपने अनुभव और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं।

सामाजिक समरसता का केंद्र – राम भवन चौक
गांव का हृदय स्थल "राम भवन चौक" है। यहां लगने वाली जन चौपाल गांव की  ग्रामीण एकता और न्यायप्रियता का प्रतीक है। गांव की पारंपरिक न्याय व्यवस्था समानता, विवेक और आपसी समझ पर आधारित है। यहां हर व्यक्ति को सम्मान और अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है।

धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
"दुगाटोला" की धार्मिक पहचान बजरंग चौक से जुड़ी हुई है, जहां विराजमान देवी-देवता ग्रामवासियों की आस्था का केंद्र हैं। यह स्थान केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जीवन के महत्व को समझाने वाला प्रेरणा केंद्र भी है।

मुख्य मार्ग के छोर पर स्थित बोगादाऊ का स्थल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जहां श्रद्धालुओं की  नाम लेने मात्र से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। वहीं तालाब के शांत किनारे स्थित " माई शीतला मंदिर" ग्रामवासियों की गहरी आस्था का प्रतीक है। चैत और कुँवार नवरात्रि के दौरान यहां भक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है।"दाई दंतेश्वरी मंदिर" ग्रामीण आस्था  की मिशाल चिहकाटोला पहाड़ी मे बिराजमान माई एक गांव को दुसरे गांव को जोड़ने वाली माई है ।जिनका द्वार केवल देव दशहरा महोत्सव के दिन खुलता है साथ ही माई की यात्रा पुरे गांव मे होते दाई शितला मिलाप के लिए जाता है। जो भक्तिभावना के साथ सेवा और समर्पण की गठजोड़ संबंध को दर्शाता  है।

शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य
गांव के अंतिम छोर पर स्थित विद्यालय दुगाटोला के भविष्य निर्माण का आधार है। यही वह स्थान है जहां बच्चों की शिक्षा की शुरुआत "ए फार एप्पल " से होती है और आगे चलकर वे "आर्मी , "चिकित्सा शिक्षा, "शिक्षक " तथा "पुलिस सेवा " बनने जैसे बड़े सपने देखते हैं और उन्हें साकार करने का प्रयास करते हैं। गांव की संस्कृति मे ही शिक्षा का वास है। तभी तो   दुगाटोला की पुरे क्षेत्र में अलग पहचान स्थापित है। 

आज दुगाटोला शिक्षा, साक्षरता और शासकीय सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिले में विशेष पहचान रखता है। जिसके पीछे यहां की शिक्षा संस्कृति है जहां अपने बच्चों को पढ़ाने के पीढ़ी ने अपना जीवन बलिदान कर दिया उस बलिदान की कीमत को नयी पीढ़ी के युवों ने अपने कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर  सिंचित कर विभिन्न शासकीय विभागों में सेवा दे रहे हैं, जो पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।

संस्कृति, परंपरा और त्योहार
दुगाटोला की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। यहां का देव दशहरा महोत्सव और उसकी भव्य झांकियां पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं, जिन्हें देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। इसके अलावा होली, दीपावली, देव मंडई तथा अन्य पारंपरिक पर्व अत्यंत उत्साह और भाईचारे के साथ मनाए जाते हैं।

इन अवसरों पर गांव के लोग सभी मतभेदों को भुलाकर प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश देते हैं। यही भावना इस गांव की सबसे बड़ी शक्ति है।

युवा शक्ति का योगदान
गांव के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में जागृति युवा संघ की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संगठन सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक गतिविधियों और ग्राम विकास के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहता है। युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए गांव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है।

उपसंहार
"दुगाटोला" केवल एक गांव नहीं, बल्कि एकता, समरसता, संस्कार और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यहां की मिट्टी में अपनापन है, लोगों के दिलों में प्रेम है और जीवन में आगे बढ़ने का उत्साह है। यह गांव हर व्यक्ति को सुखद छांव, प्रेरणा और आत्मीयता प्रदान करता है। वास्तव में, "दुगाटोला" अपने आप में एक आदर्श ग्राम की पहचान है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

"मेरा गांव दुगाटोला केवल एक स्थान नहीं, बल्कि मेरी पहचान, मेरा गौरव और मेरी आत्मा का अभिन्न हिस्सा है।"