पेसा कानून के तहत शेष तेंदूपत्ता खरीदी का अधिकार पंचायतों को देने की मांग, कवासी हरीश लखमा ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

सुकमा में जिला कांग्रेस अध्यक्ष कवासी हरीश लखमा ने पेसा कानून के अंतर्गत शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के बाद शेष बचे तेंदूपत्ता की खरीदी का अधिकार ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा को दिए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

Jan 27, 2026 - 17:38
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पेसा कानून के तहत शेष तेंदूपत्ता खरीदी का अधिकार पंचायतों को देने की मांग, कवासी हरीश लखमा ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA.रीजेंट गिरी,बीजापुर | सुकमा (छत्तीसगढ़) पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आदिवासी संग्राहकों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी सुकमा के अध्यक्ष कवासी हरीश लखमा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम कलेक्टर सुकमा को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शासन से आग्रह किया गया है कि निर्धारित लक्ष्य पूर्ण होने के बाद शेष बचे तेंदूपत्ता की खरीदी का अधिकार ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा को दिया जाए।

ज्ञापन में बताया गया कि आदिवासी अंचलों में तेंदूपत्ता की खरीदी वर्तमान में शासन अथवा वन विभाग द्वारा केवल तय लक्ष्य तक ही की जाती है। लक्ष्य पूरा हो जाने के बाद बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता ग्रामीण संग्राहकों के पास बचा रह जाता है, जिसे न तो शासन द्वारा खरीदा जाता है और न ही उसका कोई वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराया जाता है। परिणामस्वरूप मेहनत से संग्रहित किया गया तेंदूपत्ता खराब हो जाता है और गरीब आदिवासी परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

कवासी हरीश लखमा ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रह आदिवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। बुटा कटाई जैसे कठिन कार्य के बाद यदि उपज का उचित मूल्य न मिले तो यह सामाजिक और आर्थिक अन्याय है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून ग्राम सभा एवं पंचायतों को स्थानीय संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन एवं उपयोग का अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में इन अधिकारों को पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं—

  1. शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य पूर्ण होने के बाद शेष बचे तेंदूपत्ता की खरीदी का अधिकार ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा को दिया जाए।

  2. पंचायत स्तर पर खरीदी की प्रक्रिया, समर्थन मूल्य एवं भुगतान की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था शासन द्वारा सुनिश्चित की जाए।

  3. इससे आदिवासी संग्राहकों को समय पर भुगतान मिलेगा और तेंदूपत्ता की बर्बादी पर रोक लगेगी।

उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू की जाती है तो यह निर्णय पेसा कानून की मूल भावना के अनुरूप होगा और आदिवासी समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

इस अवसर पर नगर पालिका परिषद नेता प्रतिपक्ष आयशा हुसैन, नगर अध्यक्ष मोहम्मद हुसैन, पूर्व पार्षद रम्मू राठी सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।