MP News : सांसद खेल महोत्सव बना राजनीतिक अखाड़ा, पुत्र की राजनीति चमकाने करोड़ों के होर्डिंग
भैरूंदा में सांसद खेल महोत्सव खेलों से ज्यादा राजनीति का मंच बन गया है। बिना पद वाले नेताओं के पुत्रों की ब्रांडिंग पर करोड़ों खर्च, स्टेडियम को नुकसान और नियमों की अनदेखी पर सवाल।
UNITED NEWS OF ASIA. घनश्याम शर्मा, भैरूंदा | भैरूंदा नगर में आयोजित सांसद खेल महोत्सव प्रतियोगिता का समापन कार्यक्रम भले ही खेल भावना के नाम पर आयोजित किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। प्रधानमंत्री के नाम से आयोजित इस आयोजन पर अब राजनीतिक दुरुपयोग और nepotism के गंभीर आरोप लगने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सांसद खेल महोत्सव कुछ नेताओं के लिए अपने पुत्रों की राजनीति चमकाने का मंच बन गया है। हैरानी की बात यह है कि जिन युवाओं की तस्वीरें शहर भर में लगे विशाल होर्डिंग्स और बैनरों पर नजर आ रही हैं, वे किसी भी संवैधानिक या संगठनात्मक पद पर नहीं हैं।
करोड़ों का अनावश्यक खर्च, सवालों के घेरे में आयोजन
भैरूंदा में बड़े-बड़े होर्डिंग, बैनर और हाई पावर लाइट्स पर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की चर्चा है। जब प्रदेश पहले से ही आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहा है, ऐसे में यह फिजूलखर्ची जनता के बीच असंतोष पैदा कर रही है।
स्टेडियम को नुकसान, अनुमति के बिना काम
जानकारी के मुताबिक, लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से बने स्टेडियम में बिना किसी आधिकारिक अनुमति के भारी भरकम होर्डिंग और एलोजन लैंप लगाए गए, जिससे खेल मैदान को नुकसान पहुंचा है।
इस मामले में खेल विभाग के अधिकारियों ने भी अनियमितताओं की पुष्टि की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि
“हमसे बिना अनुमति लिए कार्य किया गया है। यह स्पष्ट रूप से राजनीतिक दबाव का मामला प्रतीत होता है।”
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राजनीतिक दबाव और चाटुकारिता का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पार्टी स्तर के चहेतों और चमचों की संख्या अधिक होने के कारण हर बड़ा आयोजन यहीं किया जाता है। बीते 18 वर्षों से यह क्षेत्र ‘पिता-पुत्र राजनीति’ का गढ़ माना जा रहा है, जहाँ जनहित से अधिक व्यक्तिगत प्रचार को प्राथमिकता दी जाती है।
अब सवाल यह है…
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क्या सांसद खेल महोत्सव का उद्देश्य खेलों को बढ़ावा देना है या राजनीतिक ब्रांडिंग?
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बिना पद वाले लोगों पर इतना सरकारी और गैर-सरकारी खर्च किसके आदेश पर?
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स्टेडियम को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
फिलहाल, यह पूरा मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर प्रशासनिक जांच की मांग और तेज हो सकती है।