अक्षय तृतीया पर टला बाल विवाह: छिंदवाड़ा में नाबालिग लड़के की शादी प्रशासन ने रोकी
छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र के नंदनवाड़ी गांव में अक्षय तृतीया पर होने जा रहे बाल विवाह को प्रशासन, महिला बाल विकास विभाग और सामाजिक संस्था की संयुक्त टीम ने समय रहते रोक दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नंदनवाड़ी में अक्षय तृतीया के अवसर पर होने जा रहे एक बाल विवाह को प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की सतर्कता से समय रहते रोक दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में जागरूकता और प्रशासन की सक्रियता की सराहना की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम नंदनवाड़ी के पीपरवानी निवासी सेवकराम धुर्वे (पिता मेहताब धुर्वे) की बारात बिछुआ ब्लॉक हर्रई के लिए रवाना होने वाली थी। शादी की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं—बैंड-बाजा, वाहन और मंडप तक सजा हुआ था। इसी बीच प्रदीपन संस्था की कार्यकर्ता रामेति डेहरिया को सूचना मिली कि यह विवाह नाबालिग लड़के का है।
सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी। इसके बाद पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और प्रदीपन संस्था की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम में जिला कोऑर्डिनेटर रामनाथ उईके सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और गांव के सरपंच, सचिव, कोटवार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ताओं को बुलाकर दोनों पक्षों को समझाइश दी। इसके बाद लड़के और लड़की की जन्मतिथि की जांच की गई।
जांच में पाया गया कि लड़के सेवकराम की जन्मतिथि 27 नवंबर 2006 है, जिसके अनुसार उसकी उम्र करीब 19 वर्ष 5 माह है, जो कानूनी विवाह आयु से कम है। वहीं लड़की की जन्मतिथि 1 अक्टूबर 2003 पाई गई, जिससे वह बालिग थी। इस आधार पर यह विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता था।
मौके पर ही पुलिस द्वारा पंचनामा तैयार किया गया और परिवार वालों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि बाल विवाह करना कानूनन अपराध है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि विवाह किया गया तो संबंधित लोगों को 2 वर्ष तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही इस विवाह में शामिल होने वाले पंडित, मौलवी या अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवार और ग्रामीणों को समझाने के बाद अंततः यह बाल विवाह रोक दिया गया। इस पूरी कार्रवाई में प्रशासन की तत्परता और सामाजिक संस्था की जागरूकता ने अहम भूमिका निभाई।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा आज भी समाज में मौजूद है, लेकिन सही समय पर हस्तक्षेप और जागरूकता से इसे रोका जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की घटनाओं की जानकारी तुरंत संबंधित विभागों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
कुल मिलाकर, यह कार्रवाई न केवल एक बाल विवाह को रोकने में सफल रही, बल्कि समाज में कानून और जागरूकता का संदेश भी देने में कारगर साबित हुई।