सरकारी अस्पतालों की जांच निजी कंपनियों को देने का कांग्रेस ने किया विरोध, सरकार पर निजीकरण का आरोप

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश के 1051 सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाएं निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी का विरोध किया है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, युवाओं के सरकारी रोजगार के अवसर कम होंगे और स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण बढ़ेगा।

Jul 7, 2026 - 13:55
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सरकारी अस्पतालों की जांच निजी कंपनियों को देने का कांग्रेस ने किया विरोध, सरकार पर निजीकरण का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाओं को निजी कंपनियों को सौंपने की कथित तैयारी का विरोध करते हुए राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का आरोप लगाया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के 1051 सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाओं को निजी हाथों में देने का निर्णय गरीब मरीजों, स्वास्थ्य कर्मियों और युवाओं के हितों के खिलाफ है।

धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने जानबूझकर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को कमजोर किया है। उनका कहना है कि पहले पैथोलॉजी लैब को ठेके पर दिया गया और अब रेडियोलॉजी विभाग, जिसमें एक्स-रे, सीटी स्कैन सहित 100 से अधिक प्रकार की जांच शामिल हैं, उसे भी निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में लगभग 134 प्रकार, सिविल अस्पतालों में 111 प्रकार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 97 प्रकार तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 64 प्रकार की जांच अब तक निःशुल्क उपलब्ध होती रही है। यदि इन सेवाओं का संचालन निजी कंपनियां करेंगी तो मरीजों को जांच के लिए अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि इस निर्णय से पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी की पढ़ाई कर चुके प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के अवसर कम हो जाएंगे। पार्टी का कहना है कि नियमित भर्ती करने के बजाय निजी कंपनियों को जिम्मेदारी देना युवाओं के रोजगार के साथ अन्याय होगा और इससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

धनंजय सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही हैं तो सरकार को विभाग की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान "हमर लैब" जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाओं को मजबूत किया गया था, ताकि गरीब मरीजों को निजी संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाओं का निजीकरण रोककर स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जाए। साथ ही पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती कर आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

यह बयान कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है, जिसमें सरकार की स्वास्थ्य नीति और प्रस्तावित व्यवस्थाओं को लेकर राजनीतिक आपत्ति दर्ज कराई गई है।