आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत किसानों को उन्नत उड़द बीज का वितरण, वैज्ञानिक खेती पर दिया गया जोर

कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा ने आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत लोहारा विकासखंड में कृषक संगोष्ठी आयोजित कर 70 किसानों को उन्नत उड़द किस्म आईपीयू-13-1 के प्रमाणित बीज, पीएसबी और राइजोबियम कल्चर वितरित किए। कार्यक्रम में वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया।

Jul 7, 2026 - 18:29
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आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत किसानों को उन्नत उड़द बीज का वितरण, वैज्ञानिक खेती पर दिया गया जोर

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा द्वारा आत्मनिर्भर दलहन मिशन के अंतर्गत विकासखंड लोहारा में कृषक संगोष्ठी एवं आदान सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए दलहन उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना तथा देश को दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को गति देना था। कार्यक्रम में विकासखंड के विभिन्न गांवों से लगभग 70 किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में चयनित किसानों को उड़द की उन्नत किस्म आईपीयू-13-1 के प्रमाणित बीज, फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु (पीएसबी) तथा राइजोबियम कल्चर का वितरण किया गया। मुख्य अतिथि लालाराम साहू ने किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज और जैव उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है। उन्होंने किसानों को बीजोपचार और जैव उर्वरकों के नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया।

कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने बताया कि आत्मनिर्भर दलहन मिशन का मुख्य उद्देश्य दलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाकर भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, जलवायु अनुकूल उन्नत किस्में, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, जैव उर्वरक तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, किसान प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से उड़द उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. एन.सी. बंजारा ने किसानों को उन्नत बीज चयन, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा जल संरक्षण आधारित खेती की जानकारी दी। वहीं डॉ. बी.एस. परिहार ने बताया कि आईपीयू-13-1 भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर द्वारा विकसित एक उच्च उत्पादक किस्म है, जो 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी संभावित उपज 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है तथा इसमें लगभग 26 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह किस्म कई प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी भी है।

कार्यक्रम में प्रभारी समूह प्रदर्शन इंजीनियर टी.एस. सोनवानी ने किसानों को सीड ड्रिल के माध्यम से बुआई, बीज उपचार, उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा तथा वैज्ञानिक खेती की अन्य तकनीकों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर दलहन उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने का आह्वान किया।