इस अवसर पर थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने का संदेश देते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में थोड़ी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, नकली मैसेज और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से जुड़ी घटनाओं के उदाहरण देकर ग्रामीणों को जागरूक किया।
थाना प्रभारी प्रदीप बिसेन ने बताया कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और बैंक से संबंधित जानकारी, एटीएम कार्ड विवरण, ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक या कोई भी सरकारी संस्था कभी भी फोन पर ओटीपी या गोपनीय जानकारी नहीं मांगती है। यदि इस प्रकार की कोई कॉल आती है तो तुरंत सतर्क हो जाएं और नजदीकी पुलिस थाने में इसकी सूचना दें।
सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो या दस्तावेज बिना आवश्यकता सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा न करें, क्योंकि इसका गलत उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध मैसेज, लिंक या प्रोफाइल की सूचना तुरंत पुलिस को दी जानी चाहिए।
साइबर जागरूकता के साथ-साथ कार्यक्रम में यातायात नियमों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। थाना प्रभारी ने दोपहिया वाहन चालकों को अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, नशे की हालत में वाहन न चलाने तथा सभी ट्रैफिक संकेतों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के लिए नियमों का पालन सबसे प्रभावी उपाय है।
ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि तेज गति, गलत दिशा में वाहन चलाना और मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि अपने साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा के लिए भी यातायात नियमों का पालन करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान सरकार द्वारा जारी जागरूकता संबंधी क्यूआर कोड की भी जानकारी दी गई। थाना प्रभारी ने बताया कि इस क्यूआर कोड को स्कैन कर नागरिक साइबर सुरक्षा, यातायात नियमों, जनहित योजनाओं और विभिन्न सुरक्षा सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ग्रामीणों को मौके पर ही क्यूआर कोड स्कैन कर उसका उपयोग करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम में ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और साइबर अपराधों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कई ग्रामीणों ने मोबाइल पर आने वाले संदिग्ध कॉल और मैसेज को लेकर सवाल भी पूछे, जिनका पुलिस अधिकारियों द्वारा सरल भाषा में समाधान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने पुलिस विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद आवश्यक हैं, ताकि लोग समय रहते सतर्क होकर साइबर ठगी और सड़क दुर्घटनाओं से स्वयं को सुरक्षित रख सकें।