यह कार्यक्रम प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मुचकुन्द ऋषि एवं सोन्ढूर डैम के समीप आयोजित किया गया, जहां पांच दिनों तक पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर रहा। आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों में भाग ले रहे हैं।
28 फरवरी को इस आयोजन की विशेष कड़ी के रूप में 11 निर्धन परिवारों की बेटियों का सामूहिक विवाह पूरे विधि-विधान और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ कराया गया। विवाह समारोह में वर-वधू पक्ष के परिजन, ग्रामीणजन और आमंत्रित श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर पांच दिनों तक भंडारे की भी व्यवस्था की गई, जिसमें सभी आगंतुकों और श्रद्धालुओं के लिए भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
महेश फाउंडेशन के संचालक हितेश सिन्हा ने बताया कि यह आयोजन उनके स्वर्गीय पिता की प्रेरणा और संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनके पिता का सपना था कि क्षेत्र में भगवान भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा की स्थापना की जाए और साथ ही गरीब व जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराया जाए। उसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
सामूहिक विवाह के अंतर्गत प्रत्येक कन्या को गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक उपहार प्रदान किए गए। उपहार स्वरूप पलंग, आलमारी, सोफा सेट, कूलर, ड्रेसिंग टेबल, बर्तनों का पूरा सेट तथा विवाह के जोड़े दिए गए, ताकि नवविवाहित दंपतियों को किसी प्रकार की कमी महसूस न हो और वे आत्मसम्मान के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें।
आयोजन समिति ने जानकारी दी कि यह सामूहिक विवाह योजना अब हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। भविष्य में इस कार्यक्रम को और अधिक व्यापक एवं भव्य स्वरूप देने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
इस आयोजन से क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी मजबूती मिली है। कार्यक्रम में शामिल ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने वर-वधुओं को आशीर्वाद देकर उनके सुखमय दांपत्य जीवन की कामना की। लोगों का कहना है कि भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा की स्थापना के बाद मुचकुन्द ऋषि स्थल को अब एक भव्य धार्मिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है, जिससे क्षेत्र की पहचान और धार्मिक गतिविधियों को नई दिशा मिली है।
महेश फाउंडेशन द्वारा किया गया यह आयोजन समाज में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करने वाला एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।