दुर्गम जाटलूर में विकास की नई मिसाल, आईटीबीपी ने बनाया 250 फीट लंबा सस्पेंशन ब्रिज

नारायणपुर जिले के दुर्गम जाटलूर क्षेत्र में आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी ने 250 फीट लंबे सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण कर ग्रामीणों और विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। पुल के लोकार्पण के साथ सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत साइकिलें और आवश्यक सामग्री भी वितरित की गई।

Jul 16, 2026 - 17:39
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दुर्गम जाटलूर में विकास की नई मिसाल, आईटीबीपी ने बनाया 250 फीट लंबा सस्पेंशन ब्रिज

UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास की दिशा में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले के जाटलूर क्षेत्र में आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी द्वारा 250 फीट लंबे लकड़ी के फुट सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण किया गया है। इस पुल का लोकार्पण केंद्रीय सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक अजय पाल सिंह ने किया। पुल के निर्माण से बरसात के दौरान वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है।

लगभग 250 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा यह सस्पेंशन ब्रिज आईटीबीपी के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त श्रमदान से तैयार किया गया है। निर्माण कार्य में स्थानीय संसाधनों का भी उपयोग किया गया। बरसात के मौसम में जाटलूर नाला उफान पर होने के कारण ग्रामीणों, विद्यार्थियों और सुरक्षा बलों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। पुल बनने के बाद अब पूरे वर्ष सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी।

लोकार्पण समारोह में कमांडेंट राजीव गुप्ता, अभिषेक सूद, द्वितीय कमान अशोक कुमार सिंह, संजय कुमार सहित आईटीबीपी की विभिन्न वाहिनियों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया और इस पहल का स्वागत किया।

इस अवसर पर आईटीबीपी द्वारा सिविक एक्शन प्रोग्राम (सीएपी) के तहत स्कूली विद्यार्थियों और जरूरतमंद ग्रामीणों को साइकिलें तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री वितरित की गई। साथ ही ग्रामीणों को स्वरोजगार, कौशल विकास और केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान पुल निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर महानिरीक्षक अजय पाल सिंह ने घोषणा की कि नव-निर्मित सस्पेंशन ब्रिज का नाम नक्सल विरोधी अभियान में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद अमोल माधव राव महस्के की स्मृति में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शहीद के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की अमर याद का प्रतीक रहेगा।

कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों और विद्यार्थियों के बीच मिठाइयों का वितरण किया गया तथा सामूहिक भोज का आयोजन भी हुआ। स्थानीय नागरिकों ने आईटीबीपी की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पुल क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाएगा। साथ ही यह सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास, सहयोग और जनसंपर्क को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।