29 जून को निकलेगी भगवान श्री जगन्नाथ की पावन स्नान यात्रा, 108 कलशों से होगा महाअभिषेक
रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में 29 जून को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की पारंपरिक स्नान यात्रा का आयोजन किया जाएगा। ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर 108 कलशों के अभिमंत्रित जल से महाअभिषेक किया जाएगा। स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान अनसर (विश्राम काल) में रहेंगे, जबकि 15 जुलाई को नेत्र उत्सव और 16 जुलाई को भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में 29 जून को भगवान श्री जगन्नाथ की पावन स्नान यात्रा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की जाएगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर होने वाला यह आयोजन जगन्नाथ संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
श्री जगन्नाथ सेवा समिति के संस्थापक-अध्यक्ष पुरन्दर मिश्रा ने बताया कि स्नान यात्रा का आयोजन मंदिर परिसर में पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और माता सुभद्रा का 108 कलशों के अभिमंत्रित एवं पवित्र जल से शास्त्रोक्त महाअभिषेक किया जाएगा। इस दौरान विशेष पूजन-अर्चन, वैदिक मंत्रों का उच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
उन्होंने बताया कि स्नान अनुष्ठान के पश्चात भगवान को विशेष वेशभूषा और आकर्षक श्रृंगार से अलंकृत किया जाएगा। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर में भक्तों की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण वातावरण में दर्शन और पूजा कर सकें।
जगन्नाथ परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अनसर (विश्राम काल) में चले जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और कुछ दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि में नियमित दर्शन बंद रहते हैं तथा भगवान की विशेष सेवा और उपचार की परंपरा निभाई जाती है।
विश्राम काल के उपरांत 15 जुलाई को नेत्र उत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान के पुनः दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसके अगले दिन 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ सुसज्जित रथों पर नगर भ्रमण करेंगे। रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करेंगे और भक्ति-भाव से भगवान के जयकारे लगाएंगे।
पुरन्दर मिश्रा ने सभी श्रद्धालुओं से स्नान यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की सेवा और दर्शन का यह दुर्लभ अवसर आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने का भी माध्यम है। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अनुशासन और श्रद्धा के साथ आयोजन में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।