पाटेश्वर धाम विवाद पर बालोद में आदिवासी समाज का जनआक्रोश, कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान बढ़ा तनाव

बालोद में पाटेश्वर धाम और तुएगोंदी-जामड़ीपाठ क्षेत्र से जुड़े विवाद को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने विशाल प्रदर्शन किया। हजारों प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर अपनी मांगों के समर्थन में धरना दिया। समाज ने आरक्षित वन भूमि और देवस्थलों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर 20 जून को बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

Jun 2, 2026 - 18:08
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पाटेश्वर धाम विवाद पर बालोद में आदिवासी समाज का जनआक्रोश, कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान बढ़ा तनाव

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद lबालोद जिला मुख्यालय में पाटेश्वर धाम तथा तुएगोंदी-जामड़ीपाठ क्षेत्र से जुड़े विवादों को लेकर सर्व आदिवासी समाज का व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला। हजारों की संख्या में पहुंचे समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल रहे, जिन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचने के दौरान प्रशासन द्वारा लगाई गई तीन स्तरीय बैरिकेडिंग को पार कर लिया और कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुंच गए। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई तथा परिसर के एक हिस्से में लगी टीन शेड संरचना को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी सामने आई। हालांकि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार निगरानी बनाए रखी।

सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि तुएगोंदी और जामड़ीपाठ क्षेत्र की आरक्षित वन भूमि तथा आदिवासी समुदाय के पारंपरिक देवस्थलों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां और भूमि उपयोग को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।

प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ गए। कई प्रदर्शनकारियों ने वहीं सामूहिक भोजन की व्यवस्था करते हुए खिचड़ी तैयार की और उपस्थित लोगों के बीच वितरित की। इस दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत की भी जानकारी सामने आई। कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण भी हुआ, लेकिन स्थिति नियंत्रण में बनी रही।

आंदोलनकारियों ने करीब 12 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, विवादित निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग रखी। उनका कहना है कि विभिन्न स्तरों पर शिकायतें किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का सहारा लेना पड़ा।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की। बाद में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किए जाने की भी जानकारी सामने आई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे और देर शाम तक धरना एवं नारेबाजी जारी रही।

प्रदर्शन के बीच प्रशासन की ओर से विवादित निर्माण कार्यों को रोकने संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो 20 जून को इससे भी बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिले में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन और आंदोलनकारी पक्ष के बीच आगे होने वाली बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि विवाद के समाधान के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है और दोनों पक्षों के बीच सहमति का रास्ता कैसे निकलता है।