राष्ट्रीय आम महोत्सव में 14 हजार आम की गुठलियों का संग्रह, 10 जिलों में तैयार होंगी पर्यावरण संरक्षण की नर्सरियां
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव में "11 गुठलियां लाओ, 1 आम पाओ" अभियान के तहत 14 हजार आम की गुठलियों का संग्रह किया गया। इन गुठलियों से 10 जिलों में नर्सरियां तैयार की जाएंगी। महोत्सव में बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम और विभिन्न संस्थाओं का सम्मान भी किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के उद्यानिकी विभाग और प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव का समापन उत्साह, जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में नागरिकों, किसानों, बच्चों और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए गए "11 गुठलियां लाओ, 1 आम पाओ" अभियान को लोगों का व्यापक समर्थन मिला।
सोसायटी द्वारा संचालित इस अभिनव अभियान के तहत लगभग 14 हजार आम की गुठलियों का संग्रह किया गया। इन गुठलियों का उपयोग आगामी समय में 10 जिलों में नर्सरियां तैयार करने के लिए किया जाएगा। पौधों के विकसित होने के बाद उन्हें संबंधित जिलों की 10 ग्राम पंचायतों में रोपित किया जाएगा और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रकृति की ओर सोसायटी के अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी ने बताया कि गुठलियों के संग्रह का अभियान अभी भी जारी रहेगा। इसके लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां लोग आम की गुठलियां जमा कर सकते हैं। उनका कहना है कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बन रहा है।
महोत्सव के दौरान बच्चों के लिए आयोजित मैंगो फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रतियोगिता में यश यादव ने प्रथम, शिवानी पत्रवानी ने द्वितीय और शिवम दीक्षित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन शिक्षिका और समाजसेविका संगीता ठाकुर ने किया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल आश्रम के लगभग 70 बच्चों के साथ भागीदारी की। उन्होंने बच्चों को आम महोत्सव के महत्व, पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महोत्सव में सहयोग देने वाली विभिन्न व्यापारिक और सामाजिक संस्थाओं का सम्मान भी किया गया। इसी अवसर पर बेमेतरा के पर्यावरण प्रेमी संगठन के संस्थापक विद्या भूषण दुबे और उनकी टीम को आम के पौधों की नर्सरी तैयार करने के लिए एक हजार गुठलियां प्रदान की गईं, ताकि अभियान का विस्तार अन्य क्षेत्रों तक भी किया जा सके।
कार्यक्रम में अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. विवेक त्रिपाठी, मोहन वर्ल्यानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मंच संचालन श्वेता एंकर ने किया। डॉ. अनिल चौहान, निर्भय धाडीवाल, लक्ष्मी यादव, सर्वत्र सेठी, मनीषा त्रिवेदी, शिल्पी नागपुरे, राम खटवानी, डी. के. तिवारी, दलजीत बग्गा और एस. के. टांग सहित बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राष्ट्रीय आम महोत्सव ने न केवल आम उत्पादन और उद्यानिकी को बढ़ावा देने का कार्य किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। यह पहल आने वाले समय में हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।