नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम – लक्ष्मी राजवाड़े
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और देश अधिक समावेशी बनेगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसे महिलाओं के आत्मविश्वास, अधिकार और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक संवैधानिक संशोधन नहीं है, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी देने वाला सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल “महिला-नेतृत्व विकास” की सोच को मजबूत आधार प्रदान करती है।
इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इससे महिलाओं को नीति निर्माण में भाग लेने का अवसर मिलेगा और लोकतंत्र अधिक समावेशी तथा संवेदनशील बनेगा। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि अब महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहेंगी, बल्कि वे नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। इनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिली हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हो रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका भी मजबूत हुई है।
मंत्री राजवाड़े ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम इन सभी प्रयासों को नई ऊंचाई देगा। जब महिलाएं संसद और विधानसभाओं में अधिक संख्या में पहुंचेंगी, तो वे अपने अनुभव और संवेदनशीलता के साथ समाज के विभिन्न वर्गों का बेहतर प्रतिनिधित्व कर सकेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह अधिनियम सामाजिक न्याय और समानता को सुदृढ़ करेगा। पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी पहले ही सफल साबित हो चुकी है और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने का समय आ गया है।
अंत में उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी सोच है, जो देश को सशक्त और समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जब महिलाएं सशक्त होंगी, तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी सशक्त बनेगा।