मुनगाडीह पंचायत में 15वें वित्त की राशि में गड़बड़ी के आरोप, सरपंच-सचिव पर फर्जी बिल से लाखों निकालने का दावा
कोरबा जिले के पाली जनपद अंतर्गत मुनगाडीह पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने फर्जी बिलों के माध्यम से नाली सफाई, स्कूल मरम्मत और पेयजल कार्यों के नाम पर लाखों रुपये का आहरण किया। ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा कोरबा जिले के पाली जनपद पंचायत अंतर्गत मुनगाडीह ग्राम पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार पंचायत में बुनियादी विकास कार्यों के नाम पर स्वीकृत राशि का फर्जी बिलों के माध्यम से आहरण कर गबन किया गया है, जिससे क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है।
आरोप है कि पंचायत के सरपंच और सचिव की मिलीभगत से शासकीय राशि का गलत उपयोग किया गया। जानकारी के अनुसार, नाली सफाई, स्कूल मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष निर्माण और पेयजल स्रोतों के रखरखाव जैसे कार्यों के नाम पर बड़ी मात्रा में राशि निकाली गई, जबकि जमीनी स्तर पर कई कार्य या तो अधूरे हैं या फिर हुए ही नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शौचालय मरम्मत तथा भवन सुधार के नाम पर अलग-अलग मदों से लगभग लाखों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता। इसी तरह नाली साफ-सफाई के नाम पर भी तीन अलग-अलग तिथियों में कुल 81 हजार रुपये से अधिक की राशि निकाली गई, जबकि क्षेत्र में किसी प्रकार का नियमित सफाई कार्य नहीं देखा गया।
इसके अलावा पेयजल स्रोतों के रखरखाव और सबमर्सिबल पंप से जुड़े कार्यों के नाम पर भी लगभग 1.41 लाख रुपये के भुगतान का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इन कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन नहीं हुआ, बल्कि केवल कागजों में ही काम दिखाकर राशि का आहरण किया गया।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में जनपद स्तर के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं, लेकिन संबंधित विभाग इस पर चुप्पी साधे हुए है। लोगों का आरोप है कि यदि समय पर जांच होती तो इस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सकती थी।
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा भी तेज हो गई है। ग्रामीणों ने अब उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल पंचायत स्तर पर लगे इन गंभीर आरोपों को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह लंबित रह जाएगा।