कोरबा में विवादित प्राचार्य की पोस्टिंग पर सवाल: निर्देशों के बावजूद पाली हाईस्कूल में वर्षों से पदस्थ

कोरबा जिले में एक विवादित प्राचार्य की पाली हाईस्कूल में लगातार पदस्थापना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छात्राओं की अधिक संख्या वाले स्कूल में उनकी नियुक्ति और पुनः पदस्थापना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

Apr 29, 2026 - 12:10
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कोरबा में विवादित प्राचार्य की पोस्टिंग पर सवाल: निर्देशों के बावजूद पाली हाईस्कूल में वर्षों से पदस्थ

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा/पाली। जिले के पाली हाईस्कूल में एक विवादित प्राचार्य की वर्षों से जारी पदस्थापना अब चर्चा और सवालों का विषय बन गई है। आरोप है कि पूर्व में गंभीर विवादों में घिरे रहे प्राचार्य को छात्राओं की अधिक संख्या वाले स्कूल में पदस्थ नहीं करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद उन्हें न केवल वहां नियुक्त किया गया बल्कि विरोध के बाद भी पुनः उसी पद पर बहाल कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में तानाखार हाईस्कूल में पदस्थ रहते हुए संबंधित प्राचार्य एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े गए थे। इस घटना के बाद ग्रामीणों द्वारा उन्हें पुलिस के हवाले किया गया था। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां उन्हें कुछ समय के लिए न्यायिक हिरासत में भी रहना पड़ा। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई और उन्हें निलंबित किया गया था।

तत्कालीन कलेक्टर द्वारा इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि उक्त प्राचार्य को छात्राओं की अधिक संख्या वाले स्कूल में पदस्थ न किया जाए। यह निर्देश छात्राओं की सुरक्षा और शैक्षणिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए दिया गया था।

हालांकि, वर्ष 2019-20 में निलंबन के बाद बहाली मिलने पर संबंधित प्राचार्य को पाली हाईस्कूल में पदस्थ कर दिया गया, जहां लगभग 70 प्रतिशत छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह निर्णय अपने आप में कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पूर्व में दिए गए प्रशासनिक निर्देशों के विपरीत माना जा रहा है।

इतना ही नहीं, वर्ष 2021 में पाली हाईस्कूल के छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य के आचरण को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। छात्रों ने उनकी पदस्थापना का विरोध करते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी, जिसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच किया गया। लेकिन वर्ष 2022 में एक बार फिर उनकी उसी स्कूल में वापसी हो गई, और तब से वे लगातार वहीं पदस्थ हैं।

स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में एक विवादित छवि वाले अधिकारी को बार-बार उसी स्कूल में नियुक्त किया जा रहा है, जहां छात्राओं की संख्या अधिक है। साथ ही यह भी चर्चा का विषय है कि क्या शिक्षा विभाग ने पूर्व कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी की, या फिर किसी अन्य कारण से यह निर्णय लिया गया।

मामले को लेकर आमजन और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि स्कूल एक सुरक्षित और अनुशासित वातावरण का केंद्र होना चाहिए, जहां छात्र-छात्राएं बिना किसी भय के शिक्षा ग्रहण कर सकें। ऐसे में यदि किसी अधिकारी के आचरण को लेकर पहले से सवाल उठ चुके हैं, तो उसकी नियुक्ति को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय ले। इससे न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में लोगों का विश्वास भी बना रहेगा।