शिकायत के अनुसार, खसरा नंबर 175/1 की भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय दर्ज है, उसे चिल्ड्रन पार्क के लिए प्रस्तावित किया गया था। लेकिन वर्तमान में इस भूमि पर अवैध निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है। वार्डवासियों का कहना है कि एक लोक सेवक द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लगभग 12 डिसमिल जमीन पर पक्का निर्माण कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, इसी स्थान से सटी करीब 5 डिसमिल जमीन पर एक अन्य व्यक्ति द्वारा भी कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि कानून के रक्षक ही नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करेगी। मोहल्लेवासियों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले से ही बच्चों के खेलने के लिए कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि प्रस्तावित पार्क की जमीन पर भी कब्जा हो जाता है, तो बच्चों के लिए खेल का एकमात्र विकल्प सड़कों पर खेलना ही रह जाएगा, जो उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
मोहल्लेवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि 6 दिनों के भीतर अतिक्रमण को हटाया जाए और भूमि को उसके मूल उद्देश्य, यानी चिल्ड्रन पार्क के निर्माण के लिए सुरक्षित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस चेतावनी के बाद अब प्रशासन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
यह मामला केवल एक जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। यदि सरकारी भूमि पर इस तरह के अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जाता है, तो इससे न केवल कानून व्यवस्था पर असर पड़ेगा, बल्कि आम जनता का विश्वास भी कमजोर होगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है। क्या बच्चों के लिए प्रस्तावित पार्क वास्तव में बन पाएगा, या फिर अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाएगा? यह सवाल फिलहाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ l