जानकारी के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर जिला पंचायत की बैठक के दौरान काफी हंगामा हुआ। असंतुष्ट सदस्य इस मामले में धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे थे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। हालांकि, अंतिम समय में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) दिनेश कुमार नाग द्वारा मामले की जांच कराने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिए जाने के बाद फिलहाल धरना टाल दिया गया है।
सदस्यों का आरोप है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का वितरण निष्पक्षता के सिद्धांतों के विपरीत किया गया है। उनका कहना है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां विकास कार्यों की अत्यधिक आवश्यकता है, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि कुछ खास इलाकों को प्राथमिकता दी गई। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि ग्रामीण जनता में असंतोष भी बढ़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ महिला सदस्यों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यह भी आरोप लगाया है कि केवल 15वें वित्त आयोग की राशि ही नहीं, बल्कि अन्य शासकीय योजनाओं में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं। उनका दावा है कि फंड का उपयोग निजी हितों को साधने के लिए किया जा रहा है, जो कि गंभीर जांच का विषय है।
विवाद यहीं नहीं थमता। एक अन्य सदस्य ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किए जा रहे कार्यों में लगभग 5 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा अन्य योजनाओं में भी पक्षपात और अनियमितता की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे पूरे जिले की विकास प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
हालांकि, इन आरोपों के बीच सीईओ दिनेश कुमार नाग ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। इसी आश्वासन के बाद फिलहाल सदस्यों ने अपना प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया है।
इसके बावजूद, असंतोष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सदस्यों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पारदर्शी जांच नहीं की गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। यह चेतावनी प्रशासन के लिए एक गंभीर संकेत मानी जा रही है।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएगा, बल्कि पूरे तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी कठघरे में खड़ा करेगा।