होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से पहले निकले 3 भारतीय सुपर टैंकर, 94 भारतीय क्रू सुरक्षित

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा बंद करने की घोषणा से पहले तीन भारतीय सुपर टैंकर सुरक्षित रूप से मार्ग पार कर भारत के लिए रवाना हो गए। जहाजों में 8.60 लाख टन से अधिक कच्चा तेल और 94 भारतीय क्रू सदस्य सवार हैं।

Jun 21, 2026 - 14:31
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होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से पहले निकले 3 भारतीय सुपर टैंकर, 94 भारतीय क्रू सुरक्षित

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा से ठीक पहले तीन भारतीय सुपर टैंकर सुरक्षित रूप से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पार कर भारत की ओर रवाना हो गए। इन जहाजों में कुल 94 भारतीय क्रू सदस्य सवार हैं और वे 8.60 लाख टन से अधिक कच्चा तेल लेकर आ रहे हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच कई महीनों तक चले तनाव के बाद हुए अंतरिम समझौते से उम्मीद जगी थी कि मध्य पूर्व में हालात सामान्य होंगे और वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलेगी। समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात भी आंशिक रूप से बहाल हो गया था। हालांकि लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया, जिसके बाद ईरान ने एक बार फिर जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा कर दी।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय टैंकर देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यात्रा के दौरान देश विभोर ने कुछ समय के लिए अपना मार्ग बदला था, जिससे स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई थी, लेकिन बाद में जहाज सुरक्षित रूप से अपने निर्धारित मार्ग पर लौट आया।

केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी तीनों टैंकरों के सुरक्षित गुजरने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ये जहाज 24 जून से 1 जुलाई के बीच विभिन्न भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे। प्रत्येक टैंकर में लगभग 2.85 लाख टन कच्चा तेल लदा हुआ है, जो भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्रालय के अनुसार फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 10 भारतीय जहाज और मौजूद हैं, जिनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सरकार समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सतर्क बनी हुई है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के पीछे लेबनान में इजराइली हमलों और अमेरिका द्वारा समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं करने को प्रमुख कारण बताया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां जारी रहीं तो और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

इस बीच ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ तकनीकी वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो चुका है। माना जा रहा है कि आगामी बातचीत क्षेत्रीय तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को प्रभावित होने से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भारत समेत दुनिया के कई देशों की नजर अब इन वार्ताओं और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।