खाद की कालाबाजारी के आरोपों से घिरा वितरण तंत्र, किसानों ने लगाए मनमाने दाम वसूली के आरोप
धमतरी जिले में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसानों ने यूरिया निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचने, पक्के बिल नहीं देने और कच्ची पर्चियों के आधार पर खाद वितरण किए जाने के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर कृषि विभाग ने जांच की बात कही है, जबकि किसानों ने कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले खाद वितरण व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रशासन द्वारा किसानों को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों की शिकायतें इन दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि उन्हें निर्धारित मूल्य से अधिक दरों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है और कई स्थानों पर वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में कलेक्टर अविनाश मिश्रा के निर्देश पर जिले के उर्वरक विक्रेताओं की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने सभी विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाए। इसके बावजूद कई किसानों ने खाद बिक्री में अनियमितताओं की शिकायत की है।
रविवार को साकरा फॉरेस्ट चेक पोस्ट के पास खाद से भरे एक ट्रैक्टर के पहुंचने के दौरान किसानों से बातचीत में कई गंभीर आरोप सामने आए। किसानों का कहना था कि उन्हें खाद तो उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन खरीद के दौरान मशीन से जारी होने वाला पक्का बिल नहीं दिया जा रहा। कई किसानों के पास केवल हस्तलिखित पर्चियां ही पाई गईं, जिससे वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसान शिवलाल, बुधराम, लखनलाल और विष्णु ने आरोप लगाया कि उन्हें यूरिया की एक बोरी निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक दर पर खरीदनी पड़ी। किसानों के अनुसार जहां यूरिया की बोरी का निर्धारित मूल्य लगभग 265 रुपये है, वहीं उनसे 650 रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। किसानों का कहना है कि खेती का समय होने के कारण वे मजबूरी में महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं, क्योंकि समय पर खाद नहीं मिलने से फसल प्रभावित हो सकती है।
मामले की जानकारी मिलने पर ब्लॉक कृषि अधिकारी लकेश कुमार साहू ने जांच कराने की बात कही। उन्होंने कृषि निरीक्षक को मौके पर भेजने की जानकारी दी, लेकिन किसानों का आरोप है कि काफी देर तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। बाद में कृषि विभाग की ओर से बताया गया कि संबंधित विक्रेता की बिलिंग मशीन में तकनीकी खराबी होने के कारण मशीन से बिल जारी नहीं हो पा रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में किसानों को वैकल्पिक दस्तावेज या डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि किसानों का कहना है कि यदि बिलिंग मशीन खराब थी तो उसकी सूचना पहले क्यों नहीं दी गई और बिना पक्के बिल के खाद वितरण क्यों किया गया। किसानों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
खरीफ सीजन के महत्वपूर्ण दौर में खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर उठे ये सवाल प्रशासन और कृषि विभाग के लिए चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसानों द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं और खाद वितरण व्यवस्था में कहीं अनियमितता तो नहीं हो रही है।