महामाई 16 पाली सेवा समिति फरसियां की नई कार्यकारिणी गठित, महानदी उद्गम स्थल के संरक्षण का लिया संकल्प
फरसियां स्थित महामाई धाम परिसर में आयोजित बैठक में महामाई 16 पाली सेवा समिति की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। शिवदयाल साहू को अध्यक्ष और नीरज सोन को सचिव चुना गया। नई टीम ने महानदी उद्गम स्थल के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लिया।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन l धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए पहचान रखने वाली महामाई 16 पाली सेवा समिति फरसियां की महत्वपूर्ण बैठक महामाई धाम परिसर में आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से समिति की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। नई कार्यकारिणी ने महानदी उद्गम स्थल के संरक्षण, संवर्धन और समग्र विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लिया।
बैठक की शुरुआत माँ महामाई के पूजन-अर्चन और वंदना के साथ हुई। इसके बाद समिति के वरिष्ठ सदस्यों ने संगठन की पूर्व गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में संगठन को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।
नई कार्यकारिणी में शिवदयाल साहू को अध्यक्ष तथा नीरज सोन को सचिव चुना गया। इसके अलावा गजानंद कश्यप, जोहन नेताम, दीनदयाल सेन, राधेश्याम साहू और असवंत साहू को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। सहसचिव पद पर राधेश्याम ध्रुव और कमलेश साहू को चुना गया। प्रयागचंद बिसेन को कोषाध्यक्ष, कैलाश सोन को मीडिया प्रभारी तथा अरुण प्रजापति को सांस्कृतिक प्रभारी बनाया गया। सामग्री प्रभारी के रूप में हुलास राम चिंडा, रामगुलाल बिसेन, अजब नाग, नारायण साहू, अशोक ध्रुव और संतोष साहू को जिम्मेदारी दी गई।
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का बैठक के दौरान पुष्पमालाओं से स्वागत और सम्मान किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष शिवदयाल साहू ने कहा कि फरसियां स्थित महानदी उद्गम स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर भी है। इसके संरक्षण और विकास के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने संगठन की परंपराओं और मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा दिलाया।
सचिव नीरज सोन ने कहा कि समिति का प्रमुख उद्देश्य महानदी उद्गम स्थल की स्वच्छता, पवित्रता और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है। इसके लिए नियमित सफाई अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, जल संरक्षण गतिविधियां और पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए शासन-प्रशासन के सहयोग से विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर और महानदी उद्गम क्षेत्र में सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, परिक्रमा पथ के रखरखाव तथा जल संरक्षण संबंधी कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। धार्मिक आयोजनों को अधिक व्यवस्थित और भव्य स्वरूप देने के साथ-साथ युवाओं को सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी संचालित किए जाएंगे।
मीडिया प्रभारी कैलाश सोन ने कहा कि महानदी करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। इसके उद्गम स्थल की रक्षा और संरक्षण करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समिति जनसहभागिता के माध्यम से संरक्षण और संवर्धन के कार्यों को नई गति देगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने माँ महामाई और महानदी उद्गम स्थल के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करने तथा समाजहित में सेवा गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। बैठक में पूर्व अध्यक्ष जवाहर लाल मरकाम, सरपंच केशव टेकाम, भीमसेन गजेंद्र, प्रदीप सोन, अजीत सिन्हा, त्रिलोक सोन सहित समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।