मनेंद्रगढ़ में जिला पुलिस का भव्य बलवा ड्रिल, आपात हालात से निपटने की तैयारियों का हुआ प्रदर्शन
मनेंद्रगढ़ में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए जिला पुलिस द्वारा 18वीं बटालियन परिसर में भव्य बलवा ड्रिल का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह (IPS) के नेतृत्व में हुए इस अभ्यास में पुलिस, CAF और होमगार्ड के जवानों ने भीड़ नियंत्रण, आंसू गैस, वाटर कैनन और आपात प्रबंधन का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ल,कोरिया मनेंद्रगढ़ | कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा किसी भी आपातकालीन स्थिति या उपद्रव से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से मनेंद्रगढ़ में जिला पुलिस द्वारा एक वृहद बलवा ड्रिल (Riot Drill) का आयोजन किया गया। यह अभ्यास 18वीं बटालियन परिसर में जिला पुलिस अधीक्षक (एमसीबी) रत्ना सिंह (IPS) के कुशल मार्गदर्शन एवं मौजूदगी में संपन्न हुआ।
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। नगर पुलिस अधीक्षक दीपिका मिंज, डीएसपी (मुख्यालय) तरशिला टोप्पो, एसडीओपी अलेक्सियुस टोप्पो, आरआई हेमंत टोप्पो, एसडीएम लिंगराज सिदार, तहसीलदार विनीत एवं श्रुति दुबे ने अभ्यास का निरीक्षण किया। ड्रिल में जिला पुलिस, सीएएफ (CAF) और होमगार्ड के लगभग 200 जवानों ने भाग लिया।
बलवा ड्रिल के दौरान भीड़ नियंत्रण और उपद्रव की स्थिति में कार्रवाई की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। जवानों को वाटर कैनन के माध्यम से उग्र भीड़ को नियंत्रित करने, आंसू गैस के प्रयोग, केन एवं लाठी चार्ज की सही तकनीक, राइफल पार्टी द्वारा नियंत्रित फायरिंग तथा आगजनी की स्थिति में फायर फाइटर के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही घायलों की सुरक्षित निकासी और आपातकालीन प्रबंधन की प्रक्रिया भी दिखाई गई।
पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह ने अभ्यास के दौरान जवानों की कार्यशैली का बारीकी से निरीक्षण किया और कहा कि इस प्रकार के अभ्यास पुलिस बल के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि बलवा ड्रिल से कमांड एंड कंट्रोल, आपसी समन्वय और वायरलेस संचार प्रणाली की वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगिता सिद्ध होती है।
अभ्यास के समापन पर डी-ब्रीफिंग सत्र आयोजित कर पूरे ड्रिल की समीक्षा की गई। इसमें भविष्य में और अधिक प्रभावी कार्रवाई के लिए आवश्यक सुधारों और सुझावों पर चर्चा की गई। यह बलवा ड्रिल जिला पुलिस की सतर्कता, अनुशासन और ‘शून्य चूक’ नीति का स्पष्ट उदाहरण रही।