ढपढप में उमड़ा आस्था का सागर: 21 हजार महिलाओं की भव्य कलश यात्रा ने रचा इतिहास

कोरबा के ढपढप क्षेत्र में दिव्य श्री हनुमंत कथा के शुभारंभ पर 21 हजार महिलाओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली। पूरे क्षेत्र में जयकारों और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला।

Mar 28, 2026 - 12:07
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ढपढप में उमड़ा आस्था का सागर: 21 हजार महिलाओं की भव्य कलश यात्रा ने रचा इतिहास

UNITED  NEWS OF ASIA. भूपेंद्र साहू, कोरबा।  कोरबा जिले के समीप स्थित ढपढप क्षेत्र में शुक्रवार का दिन आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। दिव्य श्री हनुमंत कथा के शुभारंभ के अवसर पर यहां एक भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 21 हजार महिलाओं ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।

पीले वस्त्रों में सुसज्जित महिलाओं ने सिर पर पवित्र कलश धारण कर जैसे ही यात्रा प्रारंभ की, पूरा क्षेत्र “जय श्री राम”, “बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय” और “जय बजरंगबली” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। जहां तक नजर जाती, वहां केवल भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यह नजारा किसी दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव से कम नहीं था।

इस भव्य कलश यात्रा ने न केवल धार्मिक परंपरा को जीवंत किया, बल्कि नारी शक्ति, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति की मजबूती का भी संदेश दिया। हजारों महिलाओं की एकजुट भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि समाज की मातृशक्ति जब धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आती है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।

इस आयोजन में दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। स्थानीय लोगों ने भी पूरे उत्साह के साथ इस यात्रा में भाग लिया। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा, स्वागत और सेवा की व्यवस्था की गई थी, जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई। हर व्यक्ति के चेहरे पर श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक आनंद स्पष्ट झलक रहा था।

आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। इसमें आयोजन समिति, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रही, जिनकी सतर्कता और मेहनत से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

दिव्य श्री हनुमंत कथा के शुभारंभ से पहले निकली यह कलश यात्रा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह भी दर्शाया कि कोरबा क्षेत्र में सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं।

इस भव्य आयोजन ने आने वाले दिनों में आयोजित होने वाली कथा के प्रति लोगों के उत्साह को और बढ़ा दिया है। श्रद्धालुओं में कथा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, और उम्मीद है कि आगामी कार्यक्रमों में भी इसी तरह की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी।

संक्षेप में, ढपढप क्षेत्र में आयोजित यह कलश यात्रा आस्था, भक्ति, अनुशासन और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम साबित हुई। यह आयोजन लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में एक दिव्य अनुभव के रूप में अंकित रहेगा।