NEET पेपर लीक में राजनीतिक मिलीभगत का आरोप, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने NEET 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने कहा कि यह करोड़ों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है और इसमें राजनीतिक संरक्षण की आशंका है। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जेपीसी जांच की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l NEET 2026 पेपर लीक मामले को लेकर आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह मामला केवल परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी परीक्षा का प्रश्नपत्र बिना राजनीतिक संरक्षण और तंत्र की मिलीभगत के लीक होना संभव नहीं है।
रायपुर में जारी बयान में उत्तम जायसवाल ने कहा कि देशभर के लगभग 23 लाख छात्र-छात्राओं ने NEET परीक्षा की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत की, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने की खबरों ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण है।
उत्तम जायसवाल ने कहा कि पिछले कई वर्षों से लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने वर्ष 2017, 2021, 2024 और अब 2026 में NEET पेपर लीक का उल्लेख करते हुए कहा कि आखिर हर कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएं क्यों दोहराई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पहले के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती, तो आज लाखों छात्रों का भविष्य संकट में नहीं पड़ता।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर उपलब्ध होने की जानकारी आखिर जांच एजेंसियों और सुरक्षा तंत्र को क्यों नहीं मिल सकी। आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह पूरे सिस्टम की विफलता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
पार्टी ने मांग की है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दें। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया जाए। पार्टी का यह भी कहना है कि जिन छात्रों का भविष्य इस घटना से प्रभावित हुआ है, उन्हें सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उत्तम जायसवाल ने कहा कि सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है, लेकिन केवल जांच एजेंसी बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी राज्यभर में उग्र आंदोलन करेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की साख को बचाने के लिए अब निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।