दंतेवाड़ा का गौरव: समाजसेवी बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान, 15 वर्ष की उम्र से कर रही हैं समाज सेवा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की सुप्रसिद्ध समाजसेवी बुधरी ताती को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। बस्तर में महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA.कमेलश, दंतेवाड़ा | बस्तर की बेटी का राष्ट्रीय सम्मान: बुधरी ताती के सेवा भाव को मिला पद्मश्री
दंतेवाड़ा (रिपोर्टर - कमलेश सिंह ठाकुर): छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र दंतेवाड़ा के लिए 25 जनवरी की शाम एक बड़ी सौगात लेकर आई। जिले की समर्पित समाजसेवी बुधरी ताती को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान देने की औपचारिक घोषणा की गई है। यह सम्मान न केवल बुधरी ताती के संघर्षों का फल है, बल्कि पूरे बस्तर संभाग के लिए गर्व का विषय है।
बचपन से ही समाज सेवा का जुनून
बुधरी ताती की कहानी प्रेरणा से भरी है। उन्होंने महज 15 वर्ष की छोटी उम्र में ही समाज सेवा की कठिन राह चुन ली थी। जब बस्तर के सुदूर अंचलों में शिक्षा और जागरूकता की कमी थी, तब बुधरी ताती ने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जगाने का बीड़ा उठाया।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा में योगदान
बुधरी ताती का मुख्य कार्यक्षेत्र बस्तर की महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना रहा है। उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
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जागरूकता अभियान: अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करना।
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शिक्षा की अलख: आदिवासी बच्चियों को स्कूल से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास।
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सामाजिक सक्रियता: दशकों से बस्तर के सामाजिक ताने-बाने को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करना।
राष्ट्रीय पहचान और खुशी की लहर
पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद पूरे छत्तीसगढ़ और दंतेवाड़ा में खुशी का माहौल है। जानकारों का मानना है कि इस सम्मान से बस्तर के सामाजिक कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और उनके कार्यों को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान मिलेगी।
बाइट (Budhari Tati): सम्मान की घोषणा के बाद बुधरी ताती ने अपनी संक्षिप्त प्रतिक्रिया में इस श्रेय को बस्तर की जनता और उन सभी महिलाओं को दिया है, जिनके लिए वे आजीवन कार्य करती रहीं।
निष्कर्ष: बुधरी ताती को पद्मश्री मिलना इस बात का प्रमाण है कि यदि सेवा भाव सच्चा हो, तो जंगल के भीतर से उठने वाली आवाज भी दिल्ली के गलियारों तक गूँजती है।