ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले काफी समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई मोहल्लों में नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही है और लोगों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। गांव की महिलाओं को सुबह से लेकर देर रात तक पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, जबकि जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
भीषण गर्मी के बीच पानी की समस्या ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि पीने के पानी के साथ-साथ घरेलू उपयोग के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कई हैंडपंप सूख चुके हैं और जो जल स्रोत बचे हैं, वहां लोगों की लंबी कतार लग रही है।
सोमवार को ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और महिलाएं सीधे हाईवे पर बैठ गईं। महिलाओं ने बाल्टी, डिब्बे और गुंडी लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते नेशनल हाईवे 130 पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई यात्री और वाहन चालक घंटों तक जाम में फंसे रहे।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही पांडुका पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक चली चर्चा के बाद किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया गया और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गांव में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए बार-बार सड़क पर उतरना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि गर्मी के मौसम में हर साल पानी की समस्या सामने आती है, लेकिन समय रहते ठोस इंतजाम नहीं किए जाते। अब ग्रामीण प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।